शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर संस्कार निधि द्वारा आईपीटी सेंटर, पेपर मिल रोड पर एक भव्य पर्यावरण जागरूकता समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के गणमान्य नागरिकों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों, पर्यावरण प्रेमियों, विद्यार्थियों तथा विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। समारोह का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, वृक्षारोपण तथा स्वच्छ जीवनशैली के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना था।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारत विकास परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुरेश जैन उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता मां शाकंभरी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर विमला वाई ने की। संस्कार निधि के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री संजय गर्ग ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज केवल एक सामाजिक विषय नहीं बल्कि मानव अस्तित्व से जुड़ा हुआ प्रश्न बन चुका है। उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण, घटते वन क्षेत्र और जल स्रोतों के लगातार क्षरण ने पर्यावरणीय संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। ऐसे में समाज के प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आना होगा।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथियों एवं विशिष्ट अतिथियों ने आईपीटी परिसर में आंवले के पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुरेश जैन, कुलपति प्रो. विमला वाई तथा संस्कार निधि के अध्यक्ष संजय गर्ग ने एक-एक आंवले का पौधा लगाकर हरित भविष्य के निर्माण का संकल्प लिया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने भी पौधारोपण को जनआंदोलन बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। वृक्षारोपण कार्यक्रम समारोह का विशेष आकर्षण रहा और बड़ी संख्या में लोगों ने पौधों के संरक्षण का संकल्प लिया।

अपने संबोधन में संजय गर्ग ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसके लिए समाज की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के कई जिले अभी भी पर्यावरणीय मानकों में बेहतर स्थान प्राप्त नहीं कर पाए हैं, जो चिंता का विषय है। उन्होंने सहारनपुर से होकर बहने वाली पांव धोई नदी का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय यह नदी निर्मल जलधारा के रूप में बहती थी और लोग उसमें स्नान कर धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियां करते थे, लेकिन आज यह नदी प्रदूषण और अतिक्रमण की मार झेल रही है। उन्होंने कहा कि यदि जल स्रोतों और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है।
संजय गर्ग ने अपने कार्यकाल के दौरान किए गए पर्यावरणीय प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि गोगा माड़ी क्षेत्र में सरोवर निर्माण का कार्य कराया गया, जिससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिला। उन्होंने कहा कि कमेला कॉलोनी में वर्षों से जमा कूड़े के विशाल ढेर को हटवाने के लिए भी प्रभावी प्रयास किए गए, जिससे क्षेत्रवासियों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध हो सका। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण का अर्थ केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि जल, भूमि और वायु को प्रदूषण से बचाना भी है।
मुख्य अतिथि सुरेश जैन ने अपने संबोधन में कहा कि प्रकृति और मानव जीवन एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि प्रकृति सुरक्षित रहेगी तो मानव सभ्यता भी सुरक्षित रहेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन विश्व की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। बढ़ता तापमान, जल संकट, अनियमित वर्षा और प्राकृतिक आपदाएं इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए और उसे वृक्ष बनने तक उसकी देखभाल करनी चाहिए। उन्होंने युवाओं से पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन युवाओं की भागीदारी से ही संभव है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही मां शाकंभरी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर विमला वाई ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी नीतियों और अभियानों के माध्यम से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए सामाजिक और शैक्षणिक जागरूकता भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों और युवाओं को प्रकृति से जोड़ना समय की आवश्यकता है। विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में पर्यावरण शिक्षा को व्यवहारिक रूप से लागू किया जाना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को समझ सके और उन्हें अपने जीवन में अपनाए। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली, जल संरक्षण और वृक्षारोपण जैसे छोटे-छोटे कदम भी बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और औद्योगिकीकरण के कारण पर्यावरण पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में पर्यावरणीय संकट और अधिक गंभीर हो सकता है। उन्होंने लोगों से स्वच्छता अपनाने, जल संरक्षण करने, प्लास्टिक का उपयोग कम करने तथा अधिक से अधिक वृक्ष लगाने का आह्वान किया।
समारोह के अंत में उपस्थित सभी लोगों को “एक पेड़ मां के नाम” अभियान से जुड़ने का संकल्प दिलाया गया। सभी ने कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी नियमित देखभाल करने का वचन लिया। कार्यक्रम का सफल संचालन राकेश शर्मा ने किया। समारोह में उपस्थित नागरिकों ने पर्यावरण संरक्षण को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और हरित वातावरण उपलब्ध कराने का संकल्प दोहराया।
कार्यक्रम में नगर निगम महापौर डॉ. अजय कुमार सिंह, नगर विधायक राजीव गुंबर, पूर्व सांसद प्रदीप चौधरी भाजपा महानगर अध्यक्ष शीतल बिश्नोई , पूर्व महानगर अध्यक्ष राकेश जैन नगर निगम उपसभापति मयंक गर्ग , पार्षद कुंवर सैन सिद्धू , पुण्य गर्ग सहित शहर के अनेक वरिष्ठ नागरिक, शिक्षाविद, उद्योगपति, व्यापारी, समाजसेवी एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने और अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने की आवश्यकता पर बल दिया। उपस्थित अतिथियों ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियानों में सक्रिय सहभागिता का संकल्प लेते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरित और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराने का आह्वान किया।
विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित यह समारोह पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने, सामाजिक सहभागिता को प्रोत्साहित करने तथा हरित भविष्य की दिशा में सामूहिक प्रयासों का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि पर्यावरण की रक्षा केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा नैतिक कर्तव्य भी है।








