गेल्हेवाला में अवैध खनन की तैयारी? खेतों की ढांग काटने का आरोप

सहारनपुर के फतेहपुर थाना क्षेत्र के गेल्हेवाला गांव के समीप अवैध मिट्टी खनन की तैयारी के आरोप। ग्रामीणों ने खेतों की ढांग काटने और रात में खनन की आशंका जताई।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

छुटमलपुर/सहारनपुर। फतेहपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गेल्हेवाला गांव के समीप कथित रूप से अवैध मिट्टी खनन की तैयारियों को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों का दावा है कि कुछ लोगों द्वारा खेतों की ऊंची-ऊंची ढांगों को काटने तथा खनन कार्य के लिए रास्ते तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है। मामले को लेकर ग्रामीणों में चिंता का माहौल है और वे प्रशासन से जांच की मांग कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार क्षेत्र में रविवार दिन के समय कुछ स्थानों पर जेसीबी मशीनों की गतिविधियां देखे जाने की चर्चा रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन स्थानों पर मशीनें कार्य करती दिखाई दीं, वहां कथित रूप से रास्तों को समतल करने का काम किया जा रहा था। ग्रामीणों का आरोप है कि यह तैयारी रात के समय मिट्टी के संभावित खनन और उसके परिवहन को ध्यान में रखकर की जा रही है।

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि बिना अनुमति खेतों की ढांग काटी जाती है या बड़े पैमाने पर मिट्टी का खनन किया जाता है तो इससे न केवल कृषि भूमि को नुकसान पहुंचेगा बल्कि पर्यावरणीय संतुलन भी प्रभावित हो सकता है। किसानों का मानना है कि खेतों की संरचना में छेड़छाड़ होने से भविष्य में जलभराव, मिट्टी कटाव और खेती संबंधी अन्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

गौरतलब है कि सहारनपुर जनपद में जिला प्रशासन द्वारा अवैध खनन के खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाए जाते रहे हैं। प्रशासन की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए जाते हैं कि बिना वैध अनुमति किसी भी प्रकार का खनन नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद यदि कहीं अवैध खनन की तैयारी या गतिविधियां सामने आती हैं तो यह प्रशासनिक निर्देशों की अवहेलना मानी जाती है।

स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि फतेहपुर थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था को लेकर थाना प्रभारी की कार्यशैली को सख्त और सक्रिय माना जाता है। ऐसे में क्षेत्रवासियों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि यदि वास्तव में खनन की तैयारी हो रही है तो संबंधित विभागों और प्रशासन को इसकी जानकारी है या नहीं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निगरानी नहीं की गई तो रात के समय अवैध खनन की गतिविधियां शुरू हो सकती हैं।

ग्रामीणों ने मांग की है कि राजस्व विभाग, खनन विभाग और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से मौके का निरीक्षण करें तथा यह स्पष्ट करें कि संबंधित भूमि पर किसी प्रकार की वैध अनुमति जारी की गई है या नहीं। उनका कहना है कि यदि सभी कार्य नियमों के अनुरूप हो रहे हैं तो स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए और यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध खनन केवल राजस्व हानि का विषय नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण और कृषि दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। मिट्टी के अनियंत्रित दोहन से भूमि की उत्पादकता प्रभावित होती है और ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ता है।

फिलहाल गेल्हेवाला गांव के आसपास कथित खनन तैयारियों को लेकर चर्चाएं जारी हैं। क्षेत्र के लोग प्रशासन की ओर से निरीक्षण और स्पष्ट कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। यदि संबंधित विभागों द्वारा जांच की जाती है तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी और अवैध गतिविधियों की आशंकाओं पर भी विराम लग सकेगा।

नोट: समाचार स्थानीय सूत्रों एवं ग्रामीणों द्वारा व्यक्त आशंकाओं पर आधारित है।

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