प्रशांत त्यागी
देवबंद। सहारनपुर जनपद के गांव रणखंडी में वर्षों से बह रहा गंदा और प्रदूषित नाला एक बार फिर ग्रामीणों की चिंता का कारण बन गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले करीब दो दशकों से यह नाला क्षेत्र में गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर रहा है और इसके कारण कई लोगों की जान जा चुकी है। अब स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि गांव के लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ने की चेतावनी दे दी है।
ग्रामीणों का कहना है कि नाले में जमा गंदगी, बदबू और प्रदूषित पानी के कारण पूरे क्षेत्र का वातावरण दूषित हो चुका है। नाले के आसपास रहने वाले लोगों को सांस लेने में परेशानी, त्वचा संबंधी रोगों और अन्य गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि गांव में कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है, जिसे ग्रामीण इस नाले के प्रदूषण से जोड़कर देख रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2018 में तत्कालीन सांसद राघव लखनपाल शर्मा के प्रयासों से प्रशासन ने नाले की सफाई कराई थी, जिससे कुछ समय के लिए राहत मिली थी। लेकिन उसके बाद न तो नियमित सफाई कराई गई और न ही नाले के स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया। परिणामस्वरूप नाला दोबारा अपनी पुरानी स्थिति में पहुंच गया है।
ग्रामीणों का दावा है कि पिछले 20 वर्षों के दौरान गांव में 70 से 80 लोग कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित होकर अपनी जान गंवा चुके हैं। वहीं वर्तमान में भी कई ग्रामीण कैंसर का उपचार दिल्ली और अन्य बड़े शहरों के अस्पतालों में करा रहे हैं। लोगों का कहना है कि दूषित पानी और प्रदूषित वातावरण के कारण गांव की नई पीढ़ी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही है।
गांव के सत्य राणा, राहुल राणा, अमरीश राणा और जितेंद्र राणा सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और शासन स्तर तक शिकायतें भेजीं। ग्रामीणों की मांग है कि गांव के बीच से गुजर रहे इस नाले का पक्का निर्माण कराया जाए तथा इसकी नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए। लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि नाले की गंदगी का असर अब भूजल पर भी दिखाई देने लगा है। कई स्थानों पर हैंडपंप और नलों का पानी दूषित हो गया है, जिससे लोगों को पीने योग्य स्वच्छ पानी तक नहीं मिल पा रहा। इससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
नाराज ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नाले की सफाई, पक्का निर्माण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो वे व्यापक जनआंदोलन शुरू करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर कार्यवाही चाहिए। ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से तत्काल हस्तक्षेप कर समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है, ताकि गांव को इस गंभीर स्वास्थ्य संकट से राहत मिल सके।








