शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। नगर निगम सहारनपुर की कार्यकारिणी समिति की बैठक में शुक्रवार को विभिन्न जनहित और विकास संबंधी मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। बैठक के दौरान कार्यकारिणी सदस्य एवं पार्षद मंसूर बदर ने बढ़ाए गए लाइसेंस शुल्कों, खाताखेड़ी की बेशकीमती भूमि, जलकल विभाग के कार्यों, स्ट्रीट लाइट व्यवस्था तथा आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़े मामलों को प्रमुखता से उठाते हुए जोरदार बहस की।
महापौर डॉ. अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सबसे अधिक चर्चा विभिन्न व्यवसायों के लाइसेंस शुल्कों को लेकर रही। पार्षद मंसूर बदर ने मांस की दुकानों और सुनारों की दुकानों पर एक समान शुल्क लगाने का विरोध करते हुए कहा कि दोनों व्यवसायों की प्रकृति और आर्थिक स्थिति अलग-अलग है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मांस और सोने का कारोबार एक समान माना जा सकता है। उनके तर्कों के बाद मांस की दुकानों का वार्षिक लाइसेंस शुल्क 2,000 रुपये निर्धारित किया गया।
बैठक में बड़ी आरा मशीनों पर प्रस्तावित 20 हजार रुपये वार्षिक शुल्क को लेकर भी मंसूर बदर ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में लकड़ी उद्योग और नक्काशी व्यवसाय मंदी के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में अत्यधिक शुल्क उद्योग के लिए नुकसानदायक होगा। उनके सुझाव पर शुल्क को घटाकर 10 हजार रुपये वार्षिक किया गया।
इसी प्रकार पान कॉर्नर के लिए प्रस्तावित 1,500 रुपये वार्षिक शुल्क को घटाकर 500 रुपये तथा अस्थायी चाय एवं जूस की दुकानों का शुल्क मात्र 200 रुपये निर्धारित किया गया।
खाताखेड़ी की बेशकीमती भूमि पर उठाए सवाल
बैठक के दौरान पार्षद मंसूर बदर ने खाताखेड़ी स्थित लगभग 1,400 वर्ग गज भूमि पर प्रस्तावित 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र निर्माण पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में भविष्य में इंटीग्रेटेड वुड क्राफ्ट कमर्शियल हब विकसित होना है, वहां भारी क्षमता का बिजलीघर स्थापित किए जाने से आसपास बनने वाली व्यावसायिक इमारतों और प्रतिष्ठानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पूर्व विस्तृत तकनीकी और सुरक्षा जांच कराने की मांग की।
जलकल विभाग के खर्चों की जांच की मांग
पार्षद मंसूर बदर ने नगर में जलकल विभाग द्वारा लगाए जा रहे ग्रीन नेट और इन्स्पिरिकल फव्वारों पर होने वाले खर्च को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि एक स्थान पर ग्रीन नेट लगाने के लिए लगभग 1.47 लाख रुपये तथा एक इन्स्पिरिकल फव्वारे पर पहले वर्ष 4.20 लाख रुपये, दूसरे वर्ष 1.05 लाख रुपये और तीसरे वर्ष 1.26 लाख रुपये खर्च दिखाया गया है।
उन्होंने दावा किया कि इस प्रकार के कार्यों की वास्तविक लागत इससे कहीं कम होती है। उन्होंने संबंधित कार्यों के एस्टीमेट और कार्यादेशों की स्वतंत्र जांच कराने तथा जीपीएस आधारित निगरानी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की।
58 वार्डों में सफाई व्यवस्था के लिए बड़ा निर्णय
कार्यकारिणी बैठक में नगर की सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए आउटसोर्सिंग सफाई कर्मचारियों के मानदेय में वृद्धि का प्रस्ताव भी सर्वसम्मति से पारित किया गया। निर्णय के अनुसार अब सफाई कर्मचारियों को प्रतिमाह 17,446 रुपये वेतन दिया जाएगा। इसके अलावा प्रत्येक माह चार सवेतन अवकाश तथा 5 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा भी उपलब्ध कराया जाएगा।
इस दौरान पार्षद मंसूर बदर ने नगर निगम में वर्षों से कार्यरत लगभग 1600 सीएलसी कर्मचारियों का मुद्दा उठाते हुए उनके भविष्य को लेकर सवाल किया। अधिकारियों की ओर से आश्वासन दिया गया कि आवश्यकता के अनुसार ऐसे कर्मचारियों को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
विकास कार्यों और वार्ड समस्याओं को भी उठाया
बैठक में मंसूर बदर ने पुल बंजारान से पुल कंबोह तक सड़क एवं नाला निर्माण, मुस्लिम गर्ल्स स्कूल के निकट सड़क चौड़ीकरण, विभिन्न वार्डों में नालों, ट्यूबवेलों और स्ट्रीट लाइटों की खराब स्थिति से जुड़े ज्ञापन भी सौंपे।
उन्होंने मोहननगर क्षेत्र के जलभराव की समस्या पर चर्चा करते हुए दबनी वाला कब्रिस्तान की भूमि की पैमाइश कराने की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि वर्ष 1948 में वक्फ की गई भूमि पर समय के साथ अतिक्रमण हुआ है, जिसकी जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
बैठक में उपसभापति मयंक गर्ग, पार्षद शबाना परवीन, राजेंद्र कोहली, फजलुर्रहमान, सुलेख चंद, ज्योति प्रणामी, दिग्विजय सिंह, आरती, अनुज जैन सहित अन्य पार्षदों ने भी अपने-अपने वार्डों से जुड़े मुद्दे उठाए।
महापौर डॉ. अजय कुमार सिंह और नगर आयुक्त शिपू गिरि ने विभिन्न विषयों पर पार्षदों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए जनहित के मुद्दों पर सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिलाया। बैठक में निगम के सभी संबंधित अधिकारी भी उपस्थित रहे।
नगर निगम की इस कार्यकारिणी बैठक में लिए गए निर्णयों को नगर के व्यापारियों, सफाई कर्मियों और आम नागरिकों के हित से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेष रूप से लाइसेंस शुल्कों में राहत और सफाई कर्मियों के वेतन वृद्धि के फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।








