शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। नगर निगम द्वारा संचालित माँ शाकंभरी कान्हा उपवन गौशाला एक बार फिर शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता के केंद्र के रूप में चर्चा में रही। गुरुवार को यहां विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें छात्र-छात्राओं ने गोवंश संरक्षण, गो-आधारित कुटीर उद्योगों और पर्यावरण अनुकूल उत्पादों के निर्माण की प्रक्रिया को नजदीक से देखा और समझा।
एरॉन एजूकेशन वेलफेयर सोसायटी के तत्वावधान में आयोजित इस भ्रमण में यूपीईएस यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी, एमिटी यूनिवर्सिटी और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों ने भाग लिया। सभी विद्यार्थी वर्तमान में एरॉन सोसायटी के साथ इंटर्नशिप कर रहे हैं। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि किस प्रकार गोबर और गोमूत्र का उपयोग कर दैनिक जीवन में काम आने वाले पर्यावरण हितैषी उत्पाद तैयार किए जाते हैं।
विद्यार्थियों ने गोबर से निर्मित दीये, राखियां, तिरंगा चेस्ट बैज, धूपबत्ती, गो-काष्ठ तथा प्राकृतिक गौमय पेंट बनाने की प्रक्रिया को देखा। इसके अलावा गोमूत्र से फिनायल तैयार करने की विधि भी विद्यार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र रही। आधुनिक दौर में जैविक और पर्यावरण अनुकूल उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए विद्यार्थियों ने इन उत्पादों के व्यावसायिक महत्व को भी समझा।
गौशाला प्रभारी डॉ. संदीप कुमार मिश्र ने विद्यार्थियों को गौशाला की कार्यप्रणाली, गोवंश संरक्षण की आवश्यकता और गौशालाओं की सामाजिक भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गौशालाएं केवल बेसहारा पशुओं के आश्रय स्थल नहीं हैं, बल्कि वे आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन और पर्यावरण संरक्षण के प्रभावी केंद्र भी बन सकती हैं। उन्होंने बताया कि नगर निगम की कान्हा गौशाला को 26 से अधिक प्रकार के गोमय उत्पादों के निर्माण और नवाचार के लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को भारतीय ग्रामीण संस्कृति से जोड़ने के उद्देश्य से मॉडर्न बुलक कार्ट (आधुनिक बैलगाड़ी) की सवारी भी कराई गई। विद्यार्थियों ने इस अनुभव का भरपूर आनंद लिया और इसे अपने लिए एक यादगार सीख बताया। इसके साथ ही उन्होंने गोवंश को अपने हाथों से हरा चारा खिलाकर गोसेवा की भावना को भी अनुभव किया।
कार्यक्रम में योगाचार्य अनीता शर्मा, एरॉन सोसायटी की निदेशक रश्मि टेरेंस सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। विद्यार्थियों ने कहा कि इस भ्रमण ने उन्हें पर्यावरण संरक्षण, जैविक उत्पादों और भारतीय संस्कृति के प्रति नई सोच प्रदान की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण युवाओं को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें व्यवहारिक अनुभव प्रदान कर समाज और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का बोध भी कराते हैं। कान्हा गौशाला का यह प्रयास शिक्षा और पर्यावरण जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।








