नानौता (सहारनपुर)। मोहर्रम की नौवीं तारीख पर नानौता नगर में पारंपरिक आस्था और अकीदत के साथ विशाल मातमी जुलूस निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में अज़ादारों ने शिरकत कर कर्बला के शहीदों, विशेष रूप से हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके साथियों को खिराज-ए-अकीदत पेश की। नगर में चांद रात से ही मजलिसों और मातम का सिलसिला जारी है, जबकि छठी मोहर्रम से विभिन्न स्थानों पर मातमी जुलूस निकाले जा रहे हैं।
गुरुवार को नगर के कदीम इमामबाड़ा सब्जवारियान में आयोजित मजलिस को मौलाना मोहम्मद हैदर नकवी ने खिताब किया। उन्होंने कर्बला के संदेश पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इमाम हुसैन की कुर्बानी इंसानियत, सत्य और न्याय की रक्षा का प्रतीक है। मजलिस के बाद विशाल मातमी जुलूस निकाला गया, जिसमें नगर की विभिन्न अंजुमनों ने नौहाखानी और सीनाजनी कर गम का इजहार किया।
जुलूस में अंजुमन जुल्फकार-ए-हैदरी, अंजुमन हुसैनिया, अंजुमन हैदरी तथा देश की प्रसिद्ध अंजुमन सरकार-ए-अबूतालिब के नौहाख्वानों ने दर्दभरे नौहे पढ़े। मास्टर फरहत हुसैन, मेहमूद अली, जफर मेहदी, तहसीन हैदर, अमीर हैदर, नदीम हैदर, उर्फी आब्दी, मोहम्मद अली, मुंसिफ हुसैन, मोहम्मद हुसैन, आइरिश अब्बास, गुलशन रजा जैदी, मुजफ्फर हुसैन, मोहम्मद नजफ, शौक आब्दी और साकिब रजा सहित अन्य नौहाख्वानों ने कर्बला के शहीदों की याद में सोजख्वानी की।
जब मातमी जुलूस इमामबाड़ा दरबार-ए-हुसैन कोट पहुंचा तो मरहूम सैय्यद जाहिद हुसैन उर्फ हाजी जुम्मन के निवास से शबीहे जुल्जनाह बरामद हुई। इस दौरान अज़ादारों ने भावुक वातावरण में मातम किया। जुलूस अपने पारंपरिक मार्गों से होता हुआ इमामबाड़ा असद अली छत्ता पहुंचकर संपन्न हुआ।
अज़ादारों की सुविधा के लिए जुलूस मार्ग पर बिछवाए गए मेट
भीषण गर्मी को देखते हुए नगर पंचायत अध्यक्ष अफज़ाल खान ने जुलूस मार्ग पर विशेष व्यवस्था कराई। अज़ादारों को नंगे पांव चलने में किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए पूरे मार्ग पर मेट (चटाइयां) बिछवाई गईं। इसके अलावा मोहर्रम शुरू होने से पहले ही जुलूस मार्गों के गड्ढों को भरवाया गया तथा साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था को दुरुस्त कराया गया।
चेयरमैन अफज़ाल खान ने बताया कि मोहर्रम के दौरान नगर पंचायत की ओर से सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं ताकि अज़ादारों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने कहा कि नगर पंचायत के सफाई कर्मचारियों ने भी इस कार्य में विशेष योगदान दिया।
शिया समाज के लोगों ने चेयरमैन अफज़ाल खान द्वारा कराई गई व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि अज़ादारों की सुविधा के लिए किया गया यह प्रयास प्रशंसनीय है। नगर में शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में निकले इस विशाल मातमी जुलूस ने कर्बला की याद को ताजा कर दिया।








