शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। नगर निगम सहारनपुर ने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लाइसेंस शुल्क को लेकर बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर ली है। नई व्यवस्था के तहत जहां निजी स्कूलों, क्लीनिकों, पैथोलॉजी सेंटर और गैस एजेंसियों के लाइसेंस शुल्क में उल्लेखनीय कमी की गई है, वहीं पहली बार कई छोटे व्यवसायों को भी लाइसेंस शुल्क के दायरे में शामिल किया गया है। इनमें ब्यूटी पार्लर, फुटवियर की दुकानें, दर्जी की दुकानें, जिम, लकड़ी के शोरूम और पुराने दोपहिया वाहनों की खरीद-फरोख्त करने वाले प्रतिष्ठान शामिल हैं।
नगर निगम ने 136 प्रकार के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए नए लाइसेंस शुल्क का प्रारूप तैयार किया है। कार्यकारिणी समिति से प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है और अब इसे अंतिम स्वीकृति के लिए बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।
नई व्यवस्था के अनुसार 500 वर्ग फीट तक की कपड़ों की दुकान के लिए 2,000 रुपये, ब्यूटी पार्लर के लिए 5,000 रुपये, जिम एवं फिटनेस सेंटर के लिए 5,000 रुपये, फुटवियर दुकान के लिए 5,000 रुपये, दर्जी की दुकान के लिए 500 रुपये तथा वाटर प्लांट और वाटर बॉटलिंग प्लांट के लिए क्रमशः 2,000 और 5,000 रुपये का वार्षिक लाइसेंस शुल्क निर्धारित किया गया है।
दूसरी ओर शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठानों को राहत दी गई है। पांचवीं तक के प्ले स्कूलों का लाइसेंस शुल्क पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड से संबद्ध 12वीं तक के स्कूलों का शुल्क 25 हजार रुपये से घटाकर 10 हजार रुपये कर दिया गया है। इसी प्रकार निजी एलोपैथिक क्लीनिक, पैथोलॉजी, एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड सेंटर का शुल्क भी आधा कर दिया गया है। गैस एजेंसियों और मीट की दुकानों के शुल्क में भी कमी की गई है।
हालांकि नगर निगम के इस फैसले पर राजनीतिक और व्यापारी स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कार्यकारिणी सदस्य एवं पार्षद मंसूर बदर का कहना है कि स्कूलों और अस्पतालों को राहत देना उचित है, लेकिन छोटे दुकानदारों और आरा मशीन संचालकों को भी समान राहत मिलनी चाहिए थी। वहीं कार्यकारिणी सदस्य एवं पार्षद टिंकू अरोड़ा ने सवाल उठाया कि बड़े कारोबारियों का शुल्क कम कर दिया गया, जबकि छोटे व्यवसायियों को पहली बार शुल्क के दायरे में लाया जा रहा है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
उधर महापौर डॉ. अजय कुमार ने नगर निगम के निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि जनता के हित को ध्यान में रखते हुए स्कूलों और अस्पतालों का शुल्क कम किया गया है। साथ ही कई नए व्यवसायों को लाइसेंस व्यवस्था में शामिल कर नियमों के दायरे में लाने का प्रयास किया गया है। उनका कहना है कि इससे नगर निगम की व्यवस्था अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होगी।
नई लाइसेंस नीति लागू होने के बाद शहर के हजारों छोटे और बड़े व्यवसाय सीधे प्रभावित होंगे। अब निगाहें नगर निगम बोर्ड की अंतिम मंजूरी पर टिकी हैं, जिसके बाद यह नई व्यवस्था पूरे शहर में प्रभावी हो जाएगी।








