शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर । देश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू हुए नौ वर्ष पूरे होने की पूर्व संध्या पर उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल ने जीएसटी व्यवस्था की समीक्षा करते हुए इसके व्यापक सरलीकरण की मांग उठाई। रेलवे रोड स्थित जिला कार्यालय में आयोजित बैठक में व्यापारियों ने कहा कि जीएसटी ने देश में कर व्यवस्था को एकीकृत करने और पारदर्शिता बढ़ाने का काम जरूर किया है, लेकिन आज भी इसकी जटिल प्रक्रियाएं व्यापारियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं।
बैठक को संबोधित करते हुए व्यापार मंडल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं जिलाध्यक्ष शीतल टंडन तथा जीएसटी प्रभारी मेजर एस.के. सूरी ने कहा कि नौ वर्ष बाद भी लगातार जारी होने वाले नोटिफिकेशन और सर्कुलर यह दर्शाते हैं कि जीएसटी व्यवस्था अब भी पूरी तरह स्थिर नहीं हो पाई है। नियमों में बार-बार होने वाले बदलावों के कारण न केवल व्यापारी बल्कि विभागीय अधिकारी भी कई बार भ्रम की स्थिति में रहते हैं।
उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा सर्वे, छापेमारी और माल परिवहन के दौरान तकनीकी कमियों के आधार पर कार्रवाई किए जाने से व्यापारियों का उत्पीड़न हो रहा है। इससे व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं और व्यापारी वर्ग अनावश्यक मानसिक एवं आर्थिक दबाव झेलने को मजबूर है।
व्यापार मंडल ने माना कि जीएसटी लागू होने के बाद पूरे देश में एक समान कर प्रणाली लागू हुई, चेक पोस्ट समाप्त हुए, फार्म-38 और सी-फॉर्म जैसी जटिल व्यवस्थाओं से राहत मिली तथा इनपुट टैक्स क्रेडिट व्यवस्था मजबूत हुई। डिजिटल प्रणाली के कारण पारदर्शिता भी बढ़ी है। इसके बावजूद अनेक व्यावहारिक समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं।
बैठक में मांग की गई कि जीएसटी की वर्तमान टैक्स दरों को कम कर 5 प्रतिशत, 8 प्रतिशत और अधिकतम 12 प्रतिशत तक सीमित किया जाए। साथ ही ई-वे बिल की इंटरस्टेट सीमा 50 हजार रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये करने, छोटे व्यापारियों को वार्षिक रिटर्न से पूर्ण छूट देने, जीएसटी रिफंड समय पर जारी करने तथा पेट्रोल और डीजल को भी जीएसटी के दायरे में शामिल करने की मांग रखी गई।
व्यापार मंडल ने यह भी कहा कि यदि किसी विक्रेता द्वारा टैक्स जमा नहीं किया जाता है तो उसकी जिम्मेदारी माल खरीदने वाले व्यापारी पर नहीं डाली जानी चाहिए। इस प्रावधान को अव्यावहारिक बताते हुए इसे समाप्त करने की मांग की गई। इसके अलावा प्रत्येक मंडल में जीएसटी ट्रिब्यूनल की स्थापना और अपील शुल्क कम किए जाने का भी आग्रह किया गया।
शीतल टंडन ने कहा कि सरकार को व्यापारियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए जीएसटी को वास्तव में सरल, पारदर्शी और व्यापार अनुकूल बनाना चाहिए। उनका कहना था कि टैक्स दरों में कमी आने से व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होगी।
बैठक में रमेश अरोड़ा, बलदेव राज खुंगर, रमेश डावर, संदीप सिंघल, मुरली खन्ना, संजीव सचदेवा, भोपाल सिंह सैनी, प्रवीण चांदना, अशोक मलिक सहित बड़ी संख्या में व्यापारी उपस्थित रहे। सभी ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार और जीएसटी परिषद व्यापारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय लेगी, ताकि जीएसटी अपने दसवें वर्ष में अधिक सरल और प्रभावी कर व्यवस्था के रूप में स्थापित हो सके।








