International Plastic Bag Free Day: छुटमलपुर प्राथमिक विद्यालय में बच्चों ने लिया प्लास्टिक मुक्त भारत का संकल्प

अंतरराष्ट्रीय प्लास्टिक बैग निषेध दिवस पर प्राथमिक विद्यालय छुटमलपुर नंबर-2 में बच्चों को प्लास्टिक के दुष्प्रभावों से अवगत कराया गया। शिक्षिका अंजली आर्य ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए प्लास्टिक मुक्त विद्यालय और समाज बनाने का संकल्प दिलाया।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। अंतरराष्ट्रीय प्लास्टिक बैग निषेध दिवस के अवसर पर विकासखंड मुजफ्फराबाद के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय छुटमलपुर नंबर-2 में पर्यावरण संरक्षण को लेकर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को प्लास्टिक बैग के दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई और उन्हें दैनिक जीवन में प्लास्टिक का उपयोग कम करने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान शिक्षिका अंजली आर्य ने बच्चों को संबोधित करते हुए बताया कि प्लास्टिक आज पर्यावरण के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुकी है। प्लास्टिक आसानी से नष्ट नहीं होती और वर्षों तक मिट्टी में पड़ी रहती है, जिससे भूमि की उर्वरता प्रभावित होती है। यदि इसे जलाया जाता है तो इससे निकलने वाली जहरीली गैसें वायु प्रदूषण बढ़ाकर मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह प्लास्टिक बैग के स्थान पर जूट, कपड़े अथवा कागज से बने थैलों का उपयोग करे। ये सभी सामग्री बायोडिग्रेडेबल होती हैं और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

कार्यक्रम में कक्षा पांच के विद्यार्थियों ने छोटी कक्षाओं के बच्चों को भी प्लास्टिक से होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बच्चों ने अपने साथियों से अपील की कि वे अपने परिवार और अभिभावकों को भी प्लास्टिक बैग का उपयोग कम करने तथा पर्यावरण हितैषी विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करें।

विद्यालय परिसर में आयोजित इस अभियान के दौरान बच्चों ने प्लास्टिक मुक्त जीवन शैली अपनाने के लिए उत्साहपूर्वक भागीदारी की। कार्यक्रम के अंत में शिक्षिका अंजली आर्य ने सभी विद्यार्थियों को “प्लास्टिक बैग मुक्त विद्यालय” बनाने का सामूहिक संकल्प दिलाया। बच्चों ने भी वादा किया कि वे स्वयं प्लास्टिक बैग का उपयोग नहीं करेंगे और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करेंगे।

विद्यालय परिवार का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत स्कूल स्तर से ही होनी चाहिए। यदि बचपन से ही बच्चों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित की जाए तो भविष्य में स्वच्छ, सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त समाज का निर्माण संभव होगा।

कार्यक्रम में विद्यालय के समस्त शिक्षक एवं शिक्षिकाएं उपस्थित रहे और सभी ने मिलकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

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