शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। सहारनपुर जनपद का रामपुर मनिहारान क्षेत्र एक बार फिर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और मिलावट के आरोपों को लेकर चर्चा में है। हाल ही में खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा दूषित टोमैटो सॉस बनाने वाली फैक्ट्री पर की गई कार्रवाई के बाद अब स्थानीय लोगों और व्यापारिक सूत्रों के बीच यह सवाल तेजी से उठने लगा है कि क्या रामपुर मनिहारान नकली खाद्य पदार्थों का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है।
हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय सूत्रों का कहना है कि पिछले डेढ़ दशक से अधिक समय से इस क्षेत्र में समय-समय पर नकली दूध, मावा, पनीर, घी, मसाले, सॉस और अन्य खाद्य उत्पादों के निर्माण एवं सप्लाई के मामले सामने आते रहे हैं। कार्रवाई के बाद कुछ समय तक गतिविधियां धीमी पड़ जाती हैं, लेकिन फिर दोबारा शुरू होने की बातें सामने आती हैं।
हाल में खाद्य सुरक्षा विभाग ने देवबंद रोड स्थित एक टोमैटो सॉस निर्माण इकाई पर छापा मारकर लगभग 550 किलोग्राम संदिग्ध सॉस नष्ट कराया तथा फैक्ट्री की उत्पादन मशीन सीज कर दी। इस कार्रवाई ने पूरे जिले में खाद्य सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
दूध की सप्लाई पर भी उठ रहे सवाल
सूत्रों के अनुसार रामपुर मनिहारान क्षेत्र से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में दूध सहारनपुर शहर और आसपास के क्षेत्रों में पहुंचता है। कई मोटरसाइकिल सवार सुबह-शाम विभिन्न कॉलोनियों और डेयरियों तक दूध पहुंचाते देखे जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह जांच का विषय है कि बाजार में पहुंचने वाला दूध पूरी तरह शुद्ध और मानकों के अनुरूप है या नहीं।
शहर के दिल्ली रोड, अंबाला रोड तथा अन्य आवासीय क्षेत्रों की कई कॉलोनियों में प्रतिदिन दूध की आपूर्ति होती है। नागरिकों का कहना है कि यदि खाद्य सुरक्षा विभाग नियमित रूप से दूध के सैंपल लेकर जांच कराए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
मावा, पनीर और घी के कारोबार पर भी नजर जरूरी
सहारनपुर में पूर्व में नकली मावा, पनीर और घी के कई मामले सामने आ चुके हैं। खाद्य विभाग द्वारा समय-समय पर कार्रवाई भी की गई है। ऐसे में लोगों का मानना है कि डेयरियों, थोक विक्रेताओं और सप्लाई चैन की नियमित जांच आवश्यक है, ताकि उपभोक्ताओं तक केवल मानकयुक्त खाद्य सामग्री ही पहुंचे।
नकली मसालों में दुकानदारों का बढ़ रहा मुनाफा
सूत्रों के अनुसार रामपुर मनिहारान क्षेत्र से कुछ व्यापारियों को कम कीमत पर मसाले उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आरोप है कि कुछ दुकानदार अधिक मुनाफे के लालच में ऐसे मसालों को सामान्य बाजार भाव पर ग्राहकों को बेच रहे हैं। यानी कम कीमत का लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच रहा, बल्कि पूरा अतिरिक्त मुनाफा दुकानदारों को मिल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे मसालों की गुणवत्ता की नियमित जांच और सैंपलिंग कराई जानी चाहिए, ताकि यदि कहीं मानकों का उल्लंघन हो रहा हो तो उस पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
कोल्ड ड्रिंक के कारोबार पर भी उठ रहे सवाल
सूत्रों के अनुसार कुछ दुकानदारों को कम कीमत पर कोल्ड ड्रिंक की सप्लाई किए जाने की बात सामने आ रही है। आरोप है कि इन उत्पादों को बाजार में सामान्य एमआरपी या प्रचलित खुदरा मूल्य पर बेचकर अधिक लाभ कमाया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि खाद्य सुरक्षा विभाग और संबंधित एजेंसियां इन उत्पादों की गुणवत्ता तथा सप्लाई चेन की जांच करें तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। यदि किसी स्तर पर मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
सॉस फैक्ट्री पर कार्रवाई के बाद बढ़े सवाल
हाल ही में जिस फैक्ट्री पर खाद्य सुरक्षा विभाग ने कार्रवाई की, वहां से टोमैटो सॉस और व्हाइट विनेगर के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद लोगों की मांग है कि जिले में संचालित अन्य खाद्य निर्माण इकाइयों का भी व्यापक निरीक्षण किया जाए।
पानी की बोतलों की गुणवत्ता पर भी उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार रामपुर मनिहारान क्षेत्र से विभिन्न ब्रांडों के नाम या निजी लेबल (प्राइवेट लेबल) के साथ पैक की गई पेयजल की बोतलों की भी सप्लाई सहारनपुर शहर और आसपास के क्षेत्रों में की जा रही है। स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि कुछ दुकानदार कम कीमत पर मिलने वाले इन उत्पादों को बाजार में निर्धारित खुदरा मूल्य पर बेचकर अधिक मुनाफा कमा रहे हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं के मन में इन बोतलबंद पानी की गुणवत्ता और शुद्धता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों ने मांग की है कि खाद्य सुरक्षा विभाग और संबंधित एजेंसियां इन पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर यूनिटों की भी नियमित जांच, सैंपलिंग और लाइसेंस सत्यापन कराएं, ताकि यदि कहीं गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन हो रहा हो तो दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जा सके।
सीमाओं पर बढ़े निगरानी अभियान की मांग
नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि सहारनपुर की सीमाओं पर खाद्य पदार्थ लेकर आने वाले वाहनों की नियमित जांच होनी चाहिए। यदि दूध, घी, पनीर, मावा, मसाले और अन्य खाद्य सामग्री के परिवहन के दौरान सैंपलिंग की जाए तो मिलावट पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकता है।
स्वास्थ्य पर पड़ सकता है गंभीर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई खाद्य पदार्थ निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होता तो उसके सेवन से पेट, लीवर, किडनी और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत नियमित निरीक्षण और प्रयोगशाला जांच अत्यंत आवश्यक है।
प्रशासन से व्यापक अभियान की मांग
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि खाद्य सुरक्षा विभाग, जिला प्रशासन और अन्य संबंधित एजेंसियां संयुक्त रूप से पूरे जिले में विशेष अभियान चलाएं। डेयरियों, मिठाई की दुकानों, मसाला व्यापारियों, सॉस निर्माण इकाइयों, कोल्ड ड्रिंक सप्लायरों तथा अन्य खाद्य कारोबारियों की नियमित सैंपलिंग कर जांच कराई जाए ताकि लोगों को सुरक्षित और शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके।
उन्होंने कहा कि मिलावट के खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई होती है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए लगातार निगरानी, सघन जांच और दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई आवश्यक है। इससे उपभोक्ताओं का विश्वास भी बढ़ेगा और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी बन सकेगी।








