शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रही स्मार्ट रोड परियोजना पर निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सड़क निर्माण अभी पूरा भी नहीं हुआ कि सीवर चैंबरों पर लगाए गए 40 टन भार क्षमता वाले एफआरसी (फाइबर-प्रबलित कंक्रीट) ढक्कनों के फ्रेम जगह-जगह से टूट गए। इसके बाद नगर निगम ने सड़क के बीच लगे सभी क्षतिग्रस्त ढक्कनों को हटाकर उनकी जगह 60 टन क्षमता वाले नए ढक्कन लगाने का फैसला किया है।
यह स्मार्ट रोड कलक्ट्रेट से हकीकतनगर, आईएमए भवन, सदर कोतवाली होते हुए दीवानी कचहरी तिराहे तक लगभग 1500 मीटर लंबाई में तैयार की जा रही है। करीब 34 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना स्मार्ट सिटी के प्रमुख कार्यों में शामिल है। सड़क निर्माण का कार्य पिछले करीब डेढ़ वर्ष से चल रहा है और इसकी धीमी प्रगति को लेकर कई बार स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन भी किया है।
सड़क पर सीवर चैंबरों के लिए सफेद रंग के गोल और चौकोर एफआरसी ढक्कन लगाए गए हैं। इनमें से कई ढक्कन फुटपाथ पर तो कई सीधे सड़क के बीच स्थापित किए गए हैं, जहां से भारी वाहन लगातार गुजरते हैं। नगर निगम के अनुसार इन ढक्कनों का चयन तकनीकी परीक्षण के बाद किया गया था। इन्हें लगभग एक माह तक परीक्षण के लिए निर्माण विभाग में रखा गया और 40 टन तक भार सहन करने योग्य बताया गया था।
हालांकि सड़क पर लगाए जाने के कुछ ही दिनों बाद कई स्थानों पर इनके फ्रेम टूट गए। इससे न केवल निर्माण गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लग गया, बल्कि राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क के बीच लगाए जाने वाले ढक्कनों को लगातार भारी वाहनों का दबाव झेलना पड़ता है, इसलिए उनकी गुणवत्ता अत्यंत मजबूत होनी चाहिए।
घटना के बाद नगर निगम ने समीक्षा करते हुए निर्णय लिया है कि सड़क के बीच स्थित सभी ढक्कनों को बदलकर 60 टन क्षमता वाले नए एफआरसी ढक्कन लगाए जाएंगे। वहीं फुटपाथ पर लगाए गए ढक्कनों को यथावत रखा जाएगा, क्योंकि उन पर भारी वाहनों का दबाव नहीं पड़ता।
एफआरसी (Fiber Reinforced Concrete) ढक्कन फाइबर और कंक्रीट के मिश्रण से तैयार किए जाते हैं। इनमें स्टील, ग्लास, सिंथेटिक या प्राकृतिक फाइबर का उपयोग किया जाता है, जिससे इन्हें अधिक मजबूत और टिकाऊ बनाने का दावा किया जाता है। लेकिन सहारनपुर स्मार्ट रोड पर इनका शुरुआती प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका।
नगर निगम के मुख्य अभियंता एस.पी. मिश्र ने बताया कि निर्माणाधीन स्मार्ट रोड पर जो भी ढक्कन क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें बदलवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब अधिक क्षमता वाले 60 टन भार सहन करने योग्य ढक्कन लगाए जाएंगे ताकि भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा न आए।
अब यह मामला केवल ढक्कन बदलने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि करोड़ों रुपये की परियोजना में गुणवत्ता नियंत्रण, तकनीकी परीक्षण और निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर रहा है। शहरवासियों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि नई व्यवस्था कितनी टिकाऊ साबित होती है।








