रामपुर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां के ड्रीम प्रोजेक्ट मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को लेकर प्रशासन की कार्रवाई तेज हो गई है। रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने विश्वविद्यालय परिसर में बने 40 में से 38 भवनों को बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्मित मानते हुए अवैध घोषित कर दिया है। प्राधिकरण ने विश्वविद्यालय प्रबंधन को निर्धारित समय सीमा के भीतर स्वयं निर्माण हटाने का निर्देश दिया है। ऐसा नहीं होने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
ध्वस्तीकरण नोटिस के बाद गुरुवार को आजम खां की पत्नी एवं पूर्व सांसद डॉ. तजीन फात्मा विश्वविद्यालय पहुंचीं। उन्होंने कहा कि संस्थान को नोटिस का जवाब देने के लिए समय मिला है और प्रबंधन कानूनी सलाह लेकर अपना पक्ष रखेगा। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में मौजूद पुलिसकर्मियों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि न्यायालय के आदेश के अनुसार प्रशासन और पुलिस इस प्रकार परिसर में नहीं बैठ सकते। इसके बाद पुलिसकर्मी परिसर से बाहर चले गए।
इधर, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने विश्वविद्यालय परिसर से होकर गुजरने वाली लगभग तीन किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क को सार्वजनिक मार्ग घोषित करते हुए मुख्य द्वार पर सूचना बोर्ड लगा दिए हैं। विभाग का कहना है कि वर्ष 2016-17 में तत्कालीन राज्य सरकार के कार्यकाल में करीब 17.16 करोड़ रुपये की लागत से इस सड़क का निर्माण कराया गया था और यह आम जनता के आवागमन के लिए है।
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2019 में विश्वविद्यालय प्रशासन ने मुख्य गेट बंद कर दिया था, जिससे आम लोगों और विभागीय अधिकारियों का आवागमन प्रभावित हुआ। इसके बाद विभाग ने नोटिस जारी किए और मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया। फिलहाल सड़क और गेट से जुड़ा विवाद न्यायालय में विचाराधीन है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सड़क सार्वजनिक है और इस संबंध में परिसर के भीतर भी सूचना बोर्ड लगाए जाएंगे।
उधर, आरडीए ने बताया कि 28 जून को बिना स्वीकृत मानचित्र के बने 38 भवनों को लेकर नोटिस जारी किया गया था। जवाब मिलने और व्यक्तिगत सुनवाई के बाद उपाध्यक्ष एवं जिलाधिकारी ने भवनों को अवैध मानते हुए ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किए। प्राधिकरण पहले ही हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल कर चुका है, जिससे किसी भी याचिका पर प्रशासन का पक्ष भी सुना जाएगा।
विश्वविद्यालय प्रबंधन के पास अब हाईकोर्ट में चुनौती देने या नियमानुसार कंपाउंडिंग एवं निर्धारित शुल्क जमा कर निर्माण को वैध कराने का विकल्प है।
वर्ष 2006 में स्थापित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय पिछले कुछ वर्षों से जमीन, लीज और निर्माण संबंधी मामलों को लेकर विवादों में रहा है। हाल ही में आजम खां और उनके परिवार ने विश्वविद्यालय ट्रस्ट से स्वयं को अलग करने की भी घोषणा की थी। प्रशासनिक कार्रवाई के बाद एक बार फिर विश्वविद्यालय प्रदेश की राजनीतिक और कानूनी चर्चाओं के केंद्र में आ गया है।








