Saharanpur News माँ शाकुम्भरी विश्वविद्यालय का चौथा दीक्षांत समारोह: 22,315 विद्यार्थियों को मिली उपाधि, 99 स्वर्ण पदकों से मेधावियों का सम्मान

माँ शाकुम्भरी विश्वविद्यालय के चौथे दीक्षांत समारोह में 22,315 विद्यार्थियों को उपाधि और 99 मेधावियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने वर्चुअल संबोधन में नशा मुक्त भारत, पर्यावरण संरक्षण और "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान का आह्वान किया।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर  , दैनिक शहरी चौपाल । माँ शाकुम्भरी विश्वविद्यालय का चतुर्थ दीक्षांत समारोह मंगलवार को सेठ गंगा प्रसाद माहेश्वरी सभागार (जनमंच) में गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। समारोह की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने वर्चुअल माध्यम से की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न स्नातक एवं परास्नातक पाठ्यक्रमों के 22,315 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जबकि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 99 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया। सभी उपाधियों को डिजीलॉकर में भी दर्ज किया गया, जिससे विद्यार्थी उन्हें ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे।

समारोह में मुख्य अतिथि भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर), मोहाली के निदेशक प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी, विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार की उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी तथा राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी एवं अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी डॉ. सुधीर एम. बोबड़े उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय की कुलपति ने संस्थान की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की जानकारी दी।

विश्वविद्यालय की ओर से इस वर्ष 7,582 छात्र और 14,733 छात्राओं को उपाधियां प्रदान की गईं। समारोह में कुल 99 स्वर्ण पदकों का वितरण किया गया, जिनमें कुलपति स्वर्ण पदक, कुलाधिपति स्वर्ण पदक तथा विभिन्न प्रायोजित स्मृति स्वर्ण पदक शामिल रहे। मेधावी विद्यार्थियों को मंच पर सम्मानित किए जाने पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

अपने संबोधन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने का मार्ग है। उन्होंने विद्यार्थियों को “जीवन भर सीखते रहो” का मंत्र देते हुए कहा कि बदलते समय के साथ नई तकनीकों, शोध और नवाचार को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज के विकास और राष्ट्र निर्माण में करने का आह्वान किया।

राज्यपाल ने 16 जुलाई से शुरू हुए नशा मुक्त भारत अभियान को जन-आंदोलन बनाने की अपील करते हुए कहा कि युवा स्वयं नशे से दूर रहें और अपने परिवार तथा समाज को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करें। उन्होंने स्वास्थ्य, टीबी मुक्त भारत अभियान, महिला स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक सेवा जैसे कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी का भी आह्वान किया।

पर्यावरण संरक्षण पर विशेष बल देते हुए उन्होंने विश्वविद्यालय के प्रत्येक छात्र-छात्रा से “एक पेड़ माँ के नाम” लगाने और उसकी देखभाल करने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण, वृक्षारोपण और स्वच्छता जैसे अभियान विकसित भारत की मजबूत नींव हैं।

समारोह के दौरान विश्वविद्यालय एवं जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास से 700 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को किट वितरित की गईं। साथ ही विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों के विद्यालयों में आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेता बच्चों को सम्मानित किया गया। प्राथमिक विद्यालय के विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण और देशभक्ति पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर सभी का मन मोह लिया।

मुख्य अतिथि प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दौर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ऑटोमेशन और आधुनिक तकनीकों का है। ऐसे समय में विद्यार्थियों को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अनुसंधान, नवाचार, खेल, समाज सेवा और व्यक्तित्व विकास पर भी बराबर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि ज्ञान ही सबसे बड़ी संपत्ति है और यही व्यक्ति को समाज में विशिष्ट पहचान दिलाता है।

उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनने का संदेश देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं के लिए उच्च शिक्षा, स्टार्टअप और रोजगार सृजन के क्षेत्र में लगातार नए अवसर उपलब्ध करा रही है। उन्होंने विशेष रूप से बेटियों की शिक्षा और महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में सफलता के नए आयाम स्थापित कर रही हैं।

अपर मुख्य सचिव डॉ. सुधीर एम. बोबड़े ने विद्यार्थियों को समय के साथ स्वयं को अपडेट रखने, नई तकनीकों को अपनाने और टीम वर्क, समय प्रबंधन तथा जिम्मेदारी जैसे गुण विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियां कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनतीं, यदि व्यक्ति में सीखने की इच्छा और मेहनत करने का जज्बा हो।

दीक्षांत समारोह के दौरान दीक्षोत्सव-2026 के अंतर्गत आयोजित भाषण, निबंध, चित्रकला, काव्य लेखन, लोकनृत्य और देशभक्ति गीत प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी पुरस्कृत किया गया। समारोह में विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक, जनप्रतिनिधि, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे।

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