मनोज मिड्ढा (दैनिक शहरी चौपाल)
सहारनपुर। गंगोह क्षेत्र के कुंडाबसी गांव स्थित पटाखा फैक्टरी में हुए भीषण विस्फोट ने एक बार फिर पटाखा उद्योग में सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच में हादसे की तीन प्रमुख वजहें सामने आई हैं—क्षमता से अधिक विस्फोटक सामग्री का भंडारण, सुरक्षा नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक स्तर पर निगरानी की कमी। इस दर्दनाक हादसे में दो ठेकेदारों की मौत हो चुकी है, जबकि दो मजदूर अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

शुक्रवार शाम करीब 4:30 बजे फैक्टरी में आतिशबाजी के लिए बारूद का मिश्रण तैयार किया जा रहा था। इसी दौरान जोरदार विस्फोट हुआ, जिसकी आवाज करीब पांच किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। धमाका इतना भीषण था कि फैक्टरी का मलबा और मानव अंग लगभग 600 मीटर दूर तक बिखर गए। मृतकों की पहचान मध्य प्रदेश के खरगोन निवासी दीपराज (23) और संदीप (25) के रूप में हुई है। वहीं आकाश और राहुल नामक दो मजदूरों की तलाश जारी है।
पहली वजह: लाइसेंस से अधिक विस्फोटक सामग्री का भंडारण
जांच में सामने आया कि फैक्टरी के पास केवल 15 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री रखने का लाइसेंस था, जबकि मौके पर बने चार कमरों में बड़ी मात्रा में बारूद और तैयार पटाखे रखे मिले। कुछ सामग्री धूप में सुखाई भी जा रही थी। अधिकारियों का मानना है कि क्षमता से अधिक भंडारण ने विस्फोट की तीव्रता बढ़ा दी।
दूसरी वजह: सुरक्षा मानकों की खुली अनदेखी
विशेषज्ञों के अनुसार पटाखा फैक्टरी आबादी से पर्याप्त दूरी पर और विशेष सुरक्षा मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। लेकिन यह फैक्टरी गांव से लगभग 300 मीटर की दूरी पर संचालित हो रही थी। जांच के दौरान एंटी-स्टेटिक फर्श, पर्याप्त अग्निशमन उपकरण, पानी की व्यवस्था, रेत के भंडार, फायर अलार्म और मजदूरों के लिए सुरक्षा किट जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं नहीं मिलीं। अधिकांश मजदूर बिना सुरक्षा उपकरणों के काम कर रहे थे और श्रमिक बीमा की व्यवस्था भी नहीं पाई गई।
तीसरी वजह: प्रशासनिक निगरानी पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि करीब डेढ़ वर्ष पहले भी इसी फैक्टरी में आग लग चुकी थी, लेकिन उस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर समीक्षा नहीं हुई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नियमित निरीक्षण केवल औपचारिकता बनकर रह गया था। यदि समय-समय पर प्रभावी जांच होती तो शायद इतना बड़ा हादसा टाला जा सकता था।
विशेषज्ञ ने बताई संभावित तकनीकी वजह
जेवी जैन कॉलेज के भौतिक विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. संजय कुमार मौर्य के अनुसार पटाखे बनाने में पोटेशियम नाइट्रेट, सल्फर और चारकोल का उपयोग किया जाता है। इन रसायनों का गलत अनुपात, अधिक तापमान, घर्षण, इलेक्ट्रिक स्पार्क या शॉर्ट सर्किट जैसी स्थितियां भी विस्फोट का कारण बन सकती हैं। हालांकि वास्तविक कारण जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
एक माह पहले आए थे मजदूर
फैक्टरी में कार्यरत अधिकांश मजदूर मध्य प्रदेश से लगभग एक माह पहले काम करने आए थे। इनमें कई युवकों की उम्र 19 से 30 वर्ष के बीच बताई गई है। मृतक दोनों ठेकेदार अविवाहित थे। हादसे के बाद उनके परिवारों में शोक की लहर है।
60 मीटर दूर था मदरसा, टला बड़ा हादसा
घटनास्थल से लगभग 60 मीटर दूर एक आवासीय मदरसा संचालित है, जहां हादसे के समय 100 से अधिक बच्चे मौजूद थे। सौभाग्य से विस्फोट का असर वहां तक नहीं पहुंचा, अन्यथा जनहानि कहीं अधिक हो सकती थी।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रताप सिंह ने बताया कि फैक्टरी के लाइसेंस, विस्फोटक सामग्री की मात्रा, सुरक्षा मानकों और अन्य पहलुओं की विस्तृत जांच की जा रही है। फैक्टरी संचालक से भी पूछताछ की जाएगी। वहीं जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस हादसे ने एक बार फिर पटाखा फैक्ट्रियों में सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।








