मनोज मिड्ढा
सहारनपुर, दैनिक शहरी चौपाल। कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद से जुड़े बहुचर्चित प्रकरण में जिला न्यायालय ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद 7 अगस्त 2026 तक स्थगन (स्टे) आदेश जारी कर दिया है। इसके साथ ही मामले की अगली सुनवाई अब निर्धारित तिथि पर होगी। इस प्रकरण को लेकर प्रशासनिक, कानूनी और सामाजिक स्तर पर लगातार चर्चा बनी हुई है।
मामले की शुरुआत बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी द्वारा की गई शिकायत से हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कलेक्ट्रेट परिसर की सरकारी भूमि पर स्थित मस्जिद का निर्माण नियमों के अनुरूप नहीं है तथा परिसर का उपयोग केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित न होकर अन्य उद्देश्यों के लिए भी किया जा रहा है। शिकायत के आधार पर प्रशासन ने मामले की जांच कर कार्रवाई शुरू की थी।
इसके बाद 16 जुलाई को सिटी मजिस्ट्रेट न्यायालय ने संबंधित स्थल को अवैध कब्जा मानते हुए 30 दिनों के भीतर हटाने के आदेश दिए थे। साथ ही सरकारी भूमि के कथित दुरुपयोग के मामले में लगभग 6.42 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। इसी आदेश को चुनौती देते हुए मस्जिद पक्ष ने जिला न्यायालय में अपील दायर की।
शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपने-अपने पक्ष में विस्तृत दलीलें रखीं। मस्जिद पक्ष की ओर से कहा गया कि संबंधित मस्जिद सुन्नी वक्फ बोर्ड में पंजीकृत है और यह वक्फ संपत्ति होने के कारण इसकी सुनवाई वक्फ अधिनियम के तहत होनी चाहिए। साथ ही वर्ष 1991 के पूजा स्थल अधिनियम (Places of Worship Act) का भी हवाला दिया गया।
वहीं प्रशासन और शिकायतकर्ता पक्ष ने राजस्व अभिलेखों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि संबंधित भूमि सरकारी रिकॉर्ड में कलेक्ट्रेट परिसर के रूप में दर्ज है तथा मस्जिद का नाम किसी भी राजस्व अभिलेख में दर्ज नहीं है। दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद जिला न्यायालय ने 7 अगस्त तक स्थगन आदेश जारी कर दिया।
मामले के शिकायतकर्ता विकास त्यागी ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और सत्य तथ्यों के आधार पर न्याय मिलेगा। उन्होंने बताया कि संभावित आगे की कानूनी प्रक्रिया को देखते हुए उच्च न्यायालय में पहले ही कैविएट भी दाखिल की जा चुकी है, ताकि किसी भी आदेश से पहले उनका पक्ष भी सुना जा सके।
कलेक्ट्रेट मस्जिद प्रकरण अब जिले के सबसे चर्चित कानूनी मामलों में शामिल हो गया है। आगामी 7 अगस्त की सुनवाई पर प्रशासन, संबंधित पक्षों और आमजन की निगाहें टिकी हुई हैं। न्यायालय के अंतिम निर्णय से इस मामले की आगे की दिशा तय होगी।









