Saharanpur News: कलेक्ट्रेट मस्जिद मामले में स्टे और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को पार्षद दल ने बताया न्याय की जीत, मंसूर बदर बोले- दमन से नहीं चलता शासन

सहारनपुर में कलेक्ट्रेट मस्जिद प्रकरण पर जिला न्यायालय के स्टे और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर पार्षद एवं कार्यकारिणी सदस्य मंसूर बदर और पार्षद दल ने इसे न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत बताया।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। कलेक्ट्रेट मस्जिद प्रकरण में जिला न्यायालय द्वारा स्थगन (स्टे) आदेश दिए जाने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद नगर निगम के पार्षद एवं कार्यकारिणी सदस्य मंसूर बदर तथा पार्षद दल ने इन घटनाओं को न्याय, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनसंघर्ष की जीत बताया। इस अवसर पर आयोजित बैठक में पार्षदों ने कहा कि लोकतंत्र में संवेदनशील मामलों का समाधान कानून और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही होना चाहिए तथा जनता की आवाज को सम्मान मिलना चाहिए।

बैठक को संबोधित करते हुए पार्षद एवं कार्यकारिणी सदस्य मंसूर बदर ने कहा कि आज का दिन सहारनपुर और देश के लिए न्याय के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जाएगा। उन्होंने कहा कि कलेक्ट्रेट मस्जिद प्रकरण में जिला न्यायालय द्वारा दिए गए स्थगन आदेश से यह स्पष्ट होता है कि विवादित मामलों में अंतिम निर्णय न्यायालय की प्रक्रिया के अनुसार होना चाहिए। उन्होंने न्यायपालिका पर विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि कानून के दायरे में रहकर ही सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।

मंसूर बदर ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के छात्रों और युवाओं की आवाज को लंबे समय तक अनसुना नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकारों को जनभावनाओं का सम्मान करना चाहिए और जनता के प्रति जवाबदेह रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि “दमनकारी नीतियों से शासन नहीं चलता, बल्कि संवाद, जवाबदेही और लोकतांत्रिक मूल्यों से व्यवस्था मजबूत होती है।”

उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में कई अवसर ऐसे आए हैं जब केंद्रीय मंत्रियों ने नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफा दिया। ऐसे में जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में जवाबदेही तय होना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि जनता की भावनाओं, छात्रों की आवाज और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान किसी भी लोकतांत्रिक शासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

बैठक में उपस्थित पार्षदों ने कहा कि न्यायपालिका पर जनता का विश्वास लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। कलेक्ट्रेट मस्जिद प्रकरण में न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के बाद सभी पक्षों को न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई होने देनी चाहिए। उन्होंने सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचने की अपील भी की।

इस अवसर पर पार्षद समीर अंसारी, सईद सिद्दीकी, महमूद हसन, गुलज़ेब खान, ज़फर अंसारी, रईस पप्पू, आसिफ अंसारी, मेनपाल, डॉ. मंसूर सहित यंग तिरंगा क्लब के उस्मान मलिक, जावेद मलिक और अविनाश शर्मा भी मौजूद रहे। सभी ने लोकतांत्रिक मूल्यों, न्यायिक प्रक्रिया और सामाजिक सद्भाव को मजबूत बनाए रखने पर जोर दिया।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में विचारों का मतभेद स्वाभाविक है, लेकिन उसका समाधान संवैधानिक संस्थाओं और कानून के दायरे में ही होना चाहिए। उन्होंने नागरिकों से भी अपील की कि वे शांति, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द को बनाए रखें तथा न्यायिक प्रक्रिया पर विश्वास रखें।

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