श्री कांत शर्मा
गागलहेड़ी (सहारनपुर)। श्रावण मास की कांवड़ यात्रा अपने चरम पर पहुंच चुकी है और सहारनपुर के गागलहेड़ी-कैलाशपुर क्षेत्र में आस्था, सेवा और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर लौट रहे हजारों कांवड़ियों की सुविधा के लिए यात्रा मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर कांवड़ सेवा शिविर स्थापित किए गए हैं। इन शिविरों में श्रद्धालुओं को निशुल्क भोजन, पेयजल, विश्राम, चिकित्सा और स्नान जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

रविवार को गागलहेड़ी क्षेत्र से गुजरने वाले कांवड़ियों में पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ सहित कई राज्यों के श्रद्धालु शामिल रहे। शिवभक्तों के जयघोष “बोल बम” और “हर-हर महादेव” से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। स्थानीय लोग भी जगह-जगह कांवड़ियों का स्वागत करते नजर आए।
पंजाब के चंडीगढ़ निवासी प्रशांत 41 लीटर गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर लौटते दिखाई दिए। वहीं जीरकपुर निवासी पंकज 21 लीटर तथा हरियाणा के कुरुक्षेत्र (लाडवा) निवासी सागर 85 लीटर गंगाजल लेकर यात्रा पूरी कर रहे हैं। पंचकूला के रामपुर चुंगी निवासी विशु, अभिषेक, अमन, हर्षित और रोहित 131 लीटर गंगाजल लेकर अपने क्षेत्र की ओर रवाना हुए, जो यात्रियों के बीच आकर्षण का केंद्र बने रहे।
इस यात्रा में युवाओं के साथ बच्चों का उत्साह भी देखने को मिला। जनपद सिरसा के रानियां गांव निवासी कक्षा नौ के छात्र जिगर पहली बार अपने साथियों अमित कुमार और विक्की के साथ कांवड़ यात्रा कर गंगाजल लेकर लौट रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहली बार कांवड़ लाने का अनुभव उनके लिए बेहद प्रेरणादायक और आध्यात्मिक रहा।
इसके अलावा कालका निवासी अमन और काला 20 लीटर तथा पंचकूला के सागर और टीटू 51 लीटर गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ते दिखाई दिए। रास्ते भर श्रद्धालु भगवान शिव के भजनों और जयघोषों के साथ आगे बढ़ते रहे।
कैलाशपुर सहित यात्रा मार्ग पर स्थापित सेवा शिविरों में स्वयंसेवक दिन-रात कांवड़ियों की सेवा में जुटे हुए हैं। श्रद्धालुओं को समय पर भोजन, ठंडा पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा, विश्राम और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सेवा समितियों का कहना है कि शिव चतुर्दशी तक शिविर पूरी क्षमता के साथ संचालित किए जाएंगे, ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा का सामना न करना पड़े।
कांवड़ यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए प्रशासन एवं ग्राम पंचायतों ने भी व्यापक तैयारियां की हैं। विशेष रूप से कैलाशपुर से यात्रा मार्ग पर रात्रि के समय प्रकाश व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। सड़क किनारे अतिरिक्त लाइटें लगाई जा रही हैं, जिससे श्रद्धालुओं को रात में भी सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।
स्थानीय लोगों ने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सेवा, समर्पण और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। हर वर्ष की तरह इस बार भी क्षेत्र के लोग बढ़-चढ़कर शिवभक्तों की सेवा में जुटे हुए हैं। प्रशासन, सेवा समितियों और स्थानीय नागरिकों के संयुक्त प्रयासों से गागलहेड़ी क्षेत्र कांवड़ियों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक पड़ाव बनता जा रहा है।
श्रद्धालुओं ने भी सेवा शिविरों की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें यात्रा के दौरान हर आवश्यक सुविधा आसानी से मिल रही है। इससे उनकी धार्मिक यात्रा और अधिक सहज एवं सुखद बन रही है।









