Kargil Vijay Diwas: 27 साल बाद भी अधूरा सम्मान! कारगिल शहीद राजेश बैरागी की प्रतिमा आज तक नहीं लगी, परिवार का छलका दर्द

कारगिल विजय दिवस पर गंगोह के कारगिल शहीद राजेश बैरागी के परिवार का दर्द छलका। 27 साल बाद भी प्रतिमा और प्रशासनिक वादे अधूरे हैं। परिजनों ने शहीद के सम्मान में घोषणाएं पूरी करने की मांग उठाई।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

गंगोह (सहारनपुर)। कारगिल विजय दिवस पर जहां पूरे देश में वीर शहीदों के अदम्य साहस और बलिदान को नमन किया गया, वहीं सहारनपुर के गंगोह क्षेत्र के गांव जेहरा में कारगिल शहीद लांस नायक राजेश बैरागी के परिवार का दर्द एक बार फिर सामने आ गया। शहीद के परिजनों का कहना है कि कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देने वाले राजेश बैरागी की याद अब केवल औपचारिकताओं तक सीमित रह गई है। शहादत के समय शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने जो वादे किए थे, वे आज 27 वर्ष बाद भी पूरे नहीं हो सके।

वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में पैराशूट रेजीमेंट में तैनात लांस नायक राजेश बैरागी ने दुश्मनों से लोहा लेते हुए मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। उनके अंतिम संस्कार के दौरान तत्कालीन प्रशासन ने गंगोह में शहीद की प्रतिमा स्थापित करने और परिजनों को खेती योग्य भूमि उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। परिजनों का आरोप है कि समय बीतता गया, लेकिन ये घोषणाएं केवल कागजों तक सीमित रह गईं।

शहीद के भाई राकेश बैरागी ने भावुक होते हुए कहा कि उनके भाई के बलिदान को शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधि धीरे-धीरे भूलते चले गए। उन्होंने कहा कि पहले कुछ वर्षों तक अधिकारी और नेता गांव आते थे, लेकिन अब राष्ट्रीय पर्वों और कारगिल विजय दिवस पर भी कोई शहीद को श्रद्धांजलि देने नहीं पहुंचता। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक पीड़ा इस बात की है कि शहीद की प्रतिमा लगाने का वादा आज तक पूरा नहीं हुआ।

परिजनों ने बताया कि शहीद के माता-पिता ताराचंद बैरागी और कांति देवी जीवनभर प्रशासन से किए गए वादों के पूरे होने का इंतजार करते रहे, लेकिन उनकी इच्छा अधूरी ही रह गई। दोनों अब इस दुनिया में नहीं हैं। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने अपनी घोषणाएं पूरी कर दी होतीं तो यह उनके माता-पिता के लिए सबसे बड़ा सम्मान होता।

गंगोह-वजीरपुर मार्ग पर स्थापित ‘शहीद राजेश बैरागी मार्ग’ का शिलापट्ट भी अब गायब हो चुका है, जिससे स्थानीय लोगों में भी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि शहीदों के सम्मान को केवल भाषणों और समारोहों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उनकी स्मृतियों को स्थायी रूप से संरक्षित किया जाना चाहिए।

कारगिल विजय दिवस के अवसर पर शहीद की पत्नी कमलेश, पुत्र रजत बैरागी और भाई राकेश बैरागी ने समाधि स्थल पर पहुंचकर पुष्प अर्पित किए और उन्हें श्रद्धांजलि दी। ग्राम प्रधान नीरज, पूर्व प्रधान मुनेश, पूर्व जिला पंचायत सदस्य नक्षत्र पाल सिंह, महिपाल, केबी सिंह सहित अनेक ग्रामीणों ने भी शहीद को नमन किया।

ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि कारगिल शहीद राजेश बैरागी की प्रतिमा शीघ्र स्थापित कराई जाए, पूर्व में की गई घोषणाओं को पूरा किया जाए तथा आने वाली पीढ़ियों को उनके बलिदान से प्रेरणा देने के लिए स्थायी स्मारक विकसित किया जाए।

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