शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर,(दैनिक शहरी चौपाल) । गोमाता की सेवा, सुरक्षा एवं सम्मान सुनिश्चित कराने की मांग को लेकर चलाए जा रहे गो सम्मान आह्वान अभियान के दूसरे चरण के अंतर्गत सोमवार को सहारनपुर में जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन और हस्ताक्षरयुक्त प्रार्थना-पत्र सौंपा गया। अभियान के तहत जनपद के लगभग 3,85,690 नागरिकों के हस्ताक्षर पेनड्राइव एवं लिखित ज्ञापन के रूप में प्रशासन को सौंपे गए।
कार्यक्रम का शुभारंभ गोपाल नगर नुमाइश कैंप स्थित श्री करुणा बिहारी मंदिर एवं प्राचीन सिद्धपीठ श्री गौ देवी मंदिर गौशाला में गो-पूजन, शंखनाद और सामूहिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ। इसके बाद गोभक्तों ने बैनर, झंडे और जागरूकता संदेशों के साथ शांतिपूर्ण प्रार्थना यात्रा निकाली, जो जिलाधिकारी कार्यालय पहुंची। वहां प्रशासनिक अधिकारियों को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा गया।

अभियान के जिला प्रभारी विजयकांत चौहान और स्वामी मंगलानंद महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गोमाता का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि गाय केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि कृषि, पर्यावरण, ग्राम्य अर्थव्यवस्था और जनकल्याण की आधारशिला भी है। उन्होंने केंद्र सरकार से गोहत्या निषेध के लिए केंद्रीय कानून बनाने, गोमाता को राष्ट्रमाता का सम्मान देने, केंद्रीय गो मंत्रालय की स्थापना, गोचर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने और गो-केंद्रित राष्ट्रीय नीति लागू करने सहित 30 से अधिक मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया।
उन्होंने बताया कि अभियान के पहले चरण में देशभर की लगभग 5,000 तहसीलों से 5 करोड़ से अधिक नागरिकों के हस्ताक्षर एकत्र कर सरकार को भेजे गए थे। मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद दूसरे चरण में देशभर के सभी जिलों से 15 करोड़ से अधिक हस्ताक्षरों के साथ अनुस्मारक प्रार्थना-पत्र भेजा जा रहा है, ताकि सरकार इस विषय पर ठोस निर्णय ले सके।

अभियान से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जनभावनाओं को सरकार तक पहुंचाना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र और राज्य सरकार इस अभियान की मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी।
इस अवसर पर रिटायर्ड कैप्टन सतीश शर्मा (सेना मेडल), महेश गांधी, राजीव चौधरी, भारतीय किसान यूनियन के प्रतिनिधि, गौरक्षा दल के पदाधिकारी, विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि, संत-महात्मा, मातृशक्ति, किसान, व्यापारी, युवा तथा बड़ी संख्या में गोभक्त मौजूद रहे।









