शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। दि कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन (पंजीकृत) सहारनपुर में संगठनात्मक विवाद खुलकर सामने आ गया है। एसोसिएशन में दो गुट बनने के बाद सोमवार को दोनों पक्षों ने अलग-अलग चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी। एक ओर ठाकुर राजसिंह गुट ने वार्षिक चुनाव प्रक्रिया पूरी कर सभी पदाधिकारियों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया, वहीं दूसरी ओर बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के निर्देशों के आधार पर गठित एल्डर्स कमेटी ने वर्ष 2026-27 के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करते हुए 5 अगस्त को मतदान कराने का ऐलान किया।

बार संघ परिसर में ठाकुर राजसिंह गुट द्वारा आयोजित चुनाव प्रक्रिया के तहत दोपहर दो बजे तक नामांकन पत्र दाखिल किए गए। चुनाव अधिकारियों के अनुसार प्रत्येक पद के लिए केवल एक-एक नामांकन प्राप्त हुआ और जांच में सभी नामांकन वैध पाए गए। इसके बाद मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी और सभी प्रत्याशियों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया।
घोषित कार्यकारिणी में हरनाथ सिंह एडवोकेट को अध्यक्ष, मोहम्मद तनवीर एडवोकेट को उपाध्यक्ष, तेजपाल सिंह एडवोकेट को महासचिव, कु. बबीता देवी एडवोकेट को कोषाध्यक्ष तथा परवेज आलम एडवोकेट को सहसचिव चुना गया। वरिष्ठ सदस्य के रूप में संदीप नंदी एडवोकेट और शिवराज सिंह एडवोकेट, जबकि कनिष्ठ सदस्य के रूप में निशी शर्मा एडवोकेट एवं रजनी नौटियाल एडवोकेट को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। चुनाव प्रक्रिया का संचालन चुनाव अधिकारी राजकुमार वर्मा, विनोद कुमार शर्मा एवं सर्वेश कुमार त्यागी एडवोकेट ने किया।

दूसरी ओर, बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष शिव किशोर गौड़ के 20 जुलाई के आदेश के अनुपालन में दि कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन (रजि.) की एल्डर्स कमेटी ने भी चुनाव कार्यक्रम जारी किया। मुख्य चुनाव अधिकारी चौधरी ऋषिपाल सिंह एडवोकेट की देखरेख में चुनाव संपन्न कराए जाएंगे।
घोषित कार्यक्रम के अनुसार 27 जुलाई से मतदाता सूची का प्रकाशन और नामांकन पत्रों की बिक्री शुरू हो चुकी है। 29 जुलाई को नामांकन दाखिल होंगे, उसी दिन उनकी जांच की जाएगी। 30 जुलाई को नाम वापसी के बाद अंतिम प्रत्याशी सूची जारी होगी। यदि आवश्यक हुआ तो 5 अगस्त को सुबह 9 बजे से अपराह्न 3 बजे तक मतदान कराया जाएगा तथा शाम 4 बजे से मतगणना होगी।
एल्डर्स कमेटी ने स्पष्ट किया है कि बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के निर्देशानुसार केवल एल्डर्स कमेटी द्वारा कराए गए चुनाव ही वैध माने जाएंगे। साथ ही केवल बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश से सीओपी (Certificate of Practice) प्राप्त अधिवक्ता ही मतदाता और प्रत्याशी बनने के पात्र होंगे। समिति ने यह भी कहा कि किसी अन्य संस्था या समिति द्वारा कराए गए चुनावों को मान्यता नहीं मिलेगी।
कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन में उत्पन्न इस स्थिति के चलते अधिवक्ताओं के बीच चुनाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब निगाहें 5 अगस्त को प्रस्तावित मतदान और उसके बाद बनने वाली नई कार्यकारिणी पर टिकी हैं।









