Saharanpur News: 500 बोतल गंगाजल लेकर लौट रहा शिवभक्त बना आकर्षण का केंद्र, 10-11 साल के बच्चों ने भी पूरी की कांवड़ यात्रा

गागलहेड़ी में 500 बोतल गंगाजल लेकर लौट रहे शिवभक्त लक्की की अनोखी कांवड़ आकर्षण का केंद्र बनी। हरियाणा और पंजाब से आए कांवड़ियों के जत्थों में 10 और 11 वर्ष के बच्चे भी शामिल रहे। बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी।

श्री कांत शर्मा

गागलहेड़ी (सहारनपुर)। सावन माह में कांवड़ यात्रा अपने चरम पर पहुंच गई है। गागलहेड़ी कस्बे से गुजर रहे हजारों शिवभक्तों की “बोल बम” और “हर-हर महादेव” की गूंज से पूरा क्षेत्र शिवमय हो उठा है। रंग-बिरंगी कांवड़ें, अलग-अलग वेशभूषा और अनोखे अंदाज में गंगाजल लेकर लौट रहे श्रद्धालु लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। लंबी दूरी के कांवड़ियों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन को और मजबूत कर दिया है।

बुधवार दोपहर पंजाब सीमा से सटे अबोहर निवासी लक्की अपनी अनोखी कांवड़ के साथ गागलहेड़ी पहुंचे। उन्होंने हाथ रेहड़े पर 500 बोतलों में गंगाजल भर रखा था, जिसे देखकर राहगीर भी ठहरकर इस अनोखी कांवड़ को निहारते रहे। लक्की ने बताया कि हरिद्वार से लाया गया 250 बोतल गंगाजल श्याम मंदिर और शेष 250 बोतल गंगाजल दूधाधारी मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए समर्पित किया जाएगा। श्रद्धा और आस्था से भरी उनकी यह यात्रा लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही।

         

इसी दौरान हरियाणा के फतेहाबाद जनपद के टोहाना से आए 17 शिवभक्तों का जत्था भी गंगाजल लेकर वापस लौटता दिखाई दिया। इस टोली में राहुल, खजान, धीरज, सौरभ, सन्नी, मेजर, दीप और पाल्ली सहित कई युवा शामिल थे। सबसे खास बात यह रही कि 10 वर्षीय नानक, जो कक्षा छह का छात्र है, और 11 वर्षीय राहुल, जो कक्षा सात में पढ़ता है, भी पूरे उत्साह और भक्ति के साथ कांवड़ यात्रा कर रहे थे। नन्हे शिवभक्तों के उत्साह और श्रद्धा ने स्थानीय लोगों का दिल जीत लिया।

कांवड़ मार्ग पर लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है तथा यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

स्थानीय सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों द्वारा भी जगह-जगह कांवड़ियों के स्वागत, पेयजल, चिकित्सा और विश्राम की व्यवस्था की जा रही है। श्रद्धा, सेवा और सुरक्षा के इस समन्वय ने गागलहेड़ी को कांवड़ यात्रा के दौरान एक जीवंत और भक्तिमय पड़ाव बना दिया है।

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