Saharanpur News: 2014 सहारनपुर हिंसा के 12 साल बाद भी नहीं भरे जख्म, पीड़ित व्यापारी आज भी कर रहे न्याय और मुआवजे का इंतजार

Saharanpur News: 2014 की सहारनपुर हिंसा के 12 साल बाद भी पीड़ित व्यापारी न्याय और मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं। कारोबार के नुकसान, लंबित मामलों और प्रशासन से राहत की मांग पर पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। वर्ष 2014 में सहारनपुर में हुई सांप्रदायिक हिंसा को 12 वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन उस दौर की दर्दनाक यादें आज भी प्रभावित व्यापारियों और उनके परिवारों के जेहन में ताजा हैं। हिंसा के दौरान जिन लोगों की दुकानें, प्रतिष्ठान, वाहन और कारोबार प्रभावित हुए थे, उनका कहना है कि इतने वर्षों बाद भी उन्हें न तो उनके नुकसान की पूरी भरपाई मिल सकी और न ही लंबित मामलों का संतोषजनक समाधान हो पाया। पीड़ित व्यापारी अब एक बार फिर प्रशासन से न्याय और मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

26 जुलाई 2014 को दो समुदायों के बीच हुए विवाद के बाद शहर के कई हिस्सों में तनाव फैल गया था। देखते ही देखते हालात हिंसक हो गए और कई स्थानों पर दुकानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तथा वाहनों में आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं। हालात बिगड़ने पर प्रशासन को कर्फ्यू लागू करना पड़ा और सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में पुलिस एवं अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती करनी पड़ी।

हिंसा से प्रभावित व्यापारियों का कहना है कि उस घटना ने उनकी वर्षों की मेहनत और पूंजी को एक झटके में खत्म कर दिया। कई लोगों की दुकानें पूरी तरह जल गईं, जबकि कई व्यापारियों का लाखों रुपये का माल नष्ट हो गया। इसके बाद उन्हें दोबारा कारोबार शुरू करने के लिए भारी आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कई परिवार कर्ज के बोझ तले दब गए और आज भी आर्थिक रूप से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं।

पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने समय-समय पर प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से मुआवजे तथा लंबित मामलों के निस्तारण की मांग की, लेकिन अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी। उनका आरोप है कि कई प्रकरण वर्षों से लंबित हैं और आज तक उनका अंतिम समाधान नहीं हो पाया। उनका मानना है कि यदि समय रहते सभी मामलों का निस्तारण हो जाता, तो प्रभावित परिवारों को बड़ी राहत मिल सकती थी।

व्यापारियों का कहना है कि 12 वर्ष बीत जाने के बावजूद उस हिंसा की पीड़ा आज भी उनके जीवन का हिस्सा बनी हुई है। आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक आघात ने भी उनके परिवारों को गहराई से प्रभावित किया। कई लोगों को अपना व्यवसाय फिर से खड़ा करने में वर्षों लग गए, जबकि कुछ आज भी पहले जैसी स्थिति हासिल नहीं कर सके हैं।

दंगा प्रभावित व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी लंबित मामलों की निष्पक्ष समीक्षा कर पात्र लोगों को न्याय दिलाया जाए। साथ ही लंबित मुआवजा प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण कर प्रभावित परिवारों को राहत प्रदान की जाए। उनका कहना है कि न्याय मिलने से न केवल पीड़ितों का भरोसा मजबूत होगा, बल्कि शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास भी बढ़ेगा।

व्यापारियों ने यह भी कहा कि सहारनपुर की पहचान हमेशा आपसी भाईचारे, सामाजिक सद्भाव और व्यापारिक संस्कृति के लिए रही है। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सामाजिक सौहार्द को मजबूत करना और कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाए रखना आवश्यक है। उनका मानना है कि समाज के सभी वर्गों के सहयोग और प्रशासन की सक्रिय भूमिका से ही शांति और विश्वास का वातावरण कायम रखा जा सकता है।

पीड़ित परिवारों का कहना है कि उनके लिए वर्ष 2014 की हिंसा केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि जीवन का ऐसा दर्द है जिसकी टीस आज भी बनी हुई है। उनका कहना है कि अब समय आ गया है कि वर्षों से लंबित मामलों का समाधान कर प्रभावित परिवारों को न्याय और राहत प्रदान की जाए।

trfgcvkj.blkjhgfd

Leave a Comment

और पढ़ें

Horoscope

Weather

और पढ़ें
error: Content is protected !!

राज्य