छड़ी पूजन के साथ गोगा म्हाड़ी पर उमड़ा आस्था का सैलाब, तीन दिन बाद भैरव मंदिर के पास सजेगा मेला गुघाल
सहारनपुर। ऐतिहासिक मेला गुघाल की धार्मिक परंपराओं के तहत सोमवार को जाहरवीर गोगाजी महाराज की म्हाड़ी पर निशान चढ़ाने के लिए हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। तीन दिन तक गंगोह रोड स्थित जाहरवीर गोगाजी महाराज की म्हाड़ी पर निशान चढ़ाने की परंपरा चलेगी। इसके बाद छड़ियां वापस सहारनपुर लौटेंगी और भैरव देव मंदिर, कल्पना सिनेमा के निकट स्थित मेला स्थल पर एकत्रित होंगी। इसके बाद नगर निगम की ओर से आयोजित दस दिवसीय मेला गुघाल का आयोजन शुरू होगा।
गोगाजी की म्हाड़ी पर आयोजित तीन दिवसीय मेले में सहारनपुर के अलावा आसपास के जिलों और दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। सोमवार को सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। बड़ी संख्या में लोग अपने साथ निशान और प्रसाद लेकर म्हाड़ी पहुंचे तथा बाबा जाहरवीर गोगाजी के दरबार में पूजा-अर्चना की। करीब 800 वर्षों से इस परंपरा के चले आने का उल्लेख विभिन्न ऐतिहासिक और स्थानीय स्रोतों में मिलता है।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद दिखाई दिया। म्हाड़ी स्थल पर प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई थी। एक गेट से श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जा रहा था, जबकि दूसरे गेट से बाहर निकाला जा रहा था। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मी लगातार निगरानी करते रहे। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए आसपास के मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्ट किया गया। पुलिस प्रशासन की चौकसी के चलते श्रद्धालुओं की आवाजाही व्यवस्थित तरीके से होती रही।
जाहरवीर गोगाजी महाराज को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है। लोकमान्यता के अनुसार बाबा के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना पूरी होती है। गोगाजी को कई क्षेत्रों में गोगा पीर और गोगा वीर के नाम से भी श्रद्धा के साथ याद किया जाता है। उनकी आस्था का दायरा अलग-अलग समुदायों तक फैला हुआ है और सहारनपुर का मेला गुघाल सामाजिक सौहार्द और साझा सांस्कृतिक परंपराओं के लिए भी जाना जाता है।
गोगाजी महाराज की म्हाड़ी सहारनपुर के गंगोह रोड पर स्थित प्रमुख धार्मिक स्थल है। स्थानीय परंपरा में छड़ियों और नेजे का विशेष महत्व माना जाता है। विभिन्न स्थानों से छड़ियां यात्रा के रूप में म्हाड़ी तक पहुंचती हैं और श्रद्धालु वहां निशान तथा प्रसाद चढ़ाकर बाबा का आशीर्वाद लेते हैं। इस दौरान पूरा क्षेत्र बाबा जाहरवीर के जयकारों से गूंजता रहा।
तीन दिन तक म्हाड़ी पर धार्मिक आयोजन के बाद छड़ियां वापस मेला स्थल पर पहुंचेंगी। भैरव देव मंदिर और कल्पना सिनेमा के निकट आयोजित होने वाला मुख्य मेला दस दिनों तक चलेगा। नगर निगम की ओर से आयोजित इस मेले में धार्मिक गतिविधियों के साथ मनोरंजन और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। मेले में शहर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग परिवार सहित पहुंचते हैं।
मेला गुघाल सहारनपुर की पुरानी पहचान से जुड़ा आयोजन है। उत्तर प्रदेश सरकार के सहारनपुर जिला पोर्टल पर भी गुघाल मेले को स्थानीय प्रमुख धार्मिक मेले के रूप में दर्ज किया गया है और इसे जाहरवीर श्री गोगाजी महाराज की म्हाड़ी से संबद्ध बताया गया है।
इस मेले की खासियत यह भी है कि इसमें अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोग अपनी-अपनी आस्था और सामाजिक सहभागिता के साथ शामिल होते हैं। यही वजह है कि मेला गुघाल को सहारनपुर की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देखा जाता है। तीन दिवसीय म्हाड़ी मेले में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने एक बार फिर बाबा जाहरवीर गोगाजी के प्रति लोगों की गहरी आस्था को सामने ला दिया। अब तीन दिन बाद छड़ियों के वापस लौटने के साथ भैरव मंदिर के निकट दस दिवसीय मेला गुघाल की रंगत शुरू होगी।
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