शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। सहारनपुर के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. वीरेंद्र आज़म को पोर्ट ब्लेयर में आयोजित 26वें अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन में सलेकचंद जैन स्मृति पत्रकारिता सम्मान से अलंकृत किया गया। साहित्य के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय अवदान के लिए उन्हें माधवराव सप्रे स्मृति सम्मान भी प्रदान किया गया। दोनों सम्मान उन्हें सम्मेलन के दौरान प्रदान किए गए।
सम्मान समारोह में साहित्य अकादेमी के निवर्तमान सचिव के. श्रीनिवास राव, प्रख्यात साहित्यकार हरिसुमन बिष्ट, सम्मेलन के समन्वयक एवं छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार जयप्रकाश मानस, ओडिशा के प्रख्यात गजलकार कुमार प्रजापति, नागपुर के साहित्यकार कृष्ण नागपाल तथा उत्तराखंड की साहित्यकार डॉ. सविता मोहन ने डॉ. आज़म को सम्मानित किया। सम्मान स्वरूप उन्हें अंगवस्त्र, प्रमाण पत्र, स्मृति चिह्न और सम्मान राशि प्रदान की गई।
25 सितंबर तक चलने वाला यह अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन माधवराव सप्रे की प्रथम लघुकथा ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ के 125 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित किया गया है। सम्मेलन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से साहित्यकार और हिंदी के विद्वान शामिल हुए हैं।
डॉ. वीरेंद्र आज़म ने सम्मेलन के अध्यक्ष मंडल के साथ दो सत्रों की अध्यक्षता भी की। सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सवा सौ वर्ष का समय बीत जाने के बावजूद लघुकथा को हिंदी साहित्य में वह स्थान नहीं मिल सका है, जिसकी वह हकदार है। उन्होंने लघुकथा के प्रति आलोचकों की उपेक्षा को इसकी प्रमुख वजहों में शामिल बताया।
उन्होंने कहा कि लघुकथा को हिंदी साहित्य में उचित स्थान दिलाने के लिए आवश्यक है कि इसे विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम से जोड़ा जाए। साथ ही आलोचकों को भी लघुकथा को केंद्र में रखकर गंभीरता से लेखन और आलोचना करनी चाहिए। अपने वक्तव्य के दौरान उन्होंने कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर की लघुकथाओं का उल्लेख किया। उन्होंने अपनी कविता और लघुकथा का वाचन भी किया।
अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन में बड़ी संख्या में साहित्यकारों की सहभागिता रही। सम्मेलन में हिंदी साहित्य, लघुकथा और उसके वर्तमान स्वरूप तथा भविष्य की संभावनाओं पर विभिन्न सत्रों में चर्चा की जा रही है। डॉ. वीरेंद्र आज़म को मिले दोनों सम्मानों पर साहित्यिक जगत से जुड़े लोगों ने प्रसन्नता व्यक्त की है।








