शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। जिला महिला अस्पताल से नवजात चोरी के मामले का पुलिस ने खुलासा करते हुए आरोपी महिला आशु निवासी बहादराबाद को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके कब्जे से नवजात को सकुशल बरामद कर परिजनों से पहचान कराने के बाद उन्हें सौंप दिया। पूछताछ में सामने आया कि नवजात चोरी करने के बाद आरोपी महिला ने अपने परिवार और आसपास के लोगों के सामने ऐसा माहौल बनाया, जैसे उसने स्वयं बेटे को जन्म दिया हो। उसने परिवार के ग्रुप में बेटे के जन्म की जानकारी दी, घर सजाया और खुशी भी मनाई।
पुलिस लाइन में एसपी सिटी व्योम बिंदल ने बताया कि 20 सितंबर को देहात कोतवाली क्षेत्र के गांव शेखपुरा कदीम निवासी नाजिम ने अपनी पत्नी शबाना को जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। उसी रात शबाना ने बेटे को जन्म दिया। 21 सितंबर को नाजिम नवजात को टीका लगवाने के लिए ऑपरेशन थिएटर के पास लेकर पहुंचा था। इसी दौरान खुद को अस्पताल की स्टाफ बताने वाली महिला ने उससे नवजात को ले लिया और टीके का कार्ड लाने के लिए भेज दिया। नाजिम के वहां से हटते ही महिला नवजात को लेकर अस्पताल से निकल गई।
घटना के बाद थाना जनकपुरी पुलिस और एसओजी की छह टीमों को आरोपी की तलाश में लगाया गया। बुधवार रात पुलिस टीम ने देहरादून हाईवे पर बड़कला मोड़ के पास से आरोपी महिला आशु को गिरफ्तार कर लिया। उसके कब्जे से नवजात भी सुरक्षित बरामद हुआ। इसके बाद पुलिस टीम नवजात को लेकर महिला अस्पताल पहुंची और परिजनों से पहचान कराने के बाद उसे उनके सुपुर्द कर दिया।
पुलिस के अनुसार मूलरूप से तीतरों निवासी आशु की करीब 23 वर्ष पहले फतेहपुर थाना क्षेत्र के मुजफ्फराबाद निवासी सोनू से शादी हुई थी। उसके तीन बच्चे हैं, जिनमें दो बेटियों की शादी हो चुकी है, जबकि बेटा अविवाहित है। पुलिस के मुताबिक करीब पांच वर्ष पहले पति ने उसे साथ रखने से मना कर दिया था। इसके बाद उसने भगवानपुर स्थित एक निजी कंपनी में नौकरी शुरू कर दी। इसी दौरान उसकी मुलाकात बहादराबाद निवासी अंकुर से हुई और दोनों ने शादी कर ली। पुलिस का कहना है कि दूसरी शादी के बाद भी महिला को कोई बच्चा नहीं हुआ और बाद में अंकुर ने भी उससे दूरी बनानी शुरू कर दी। इसके बाद उसने नवजात चोरी करने की योजना बनाई।
नवजात चोरी करने के बाद आरोपी महिला बहादराबाद पहुंची। पुलिस के अनुसार वहां उसने अपने मोबाइल से परिवार के ग्रुप में मैसेज कर बेटा होने की जानकारी दी। उसने घर को सजाया और बेटे के जन्म की खुशी मनाई। पड़ोसियों को भी बताया कि उसके बेटा हुआ है। पुलिस के मुताबिक इससे पहले वह अपने रिश्तेदारों और मोहल्ले के लोगों को भी यह विश्वास दिलाती रही थी कि वह मां बनने वाली है।
पुलिस के मुताबिक आरोपी महिला ने वारदात से पहले जिला महिला अस्पताल की कई दिनों तक रेकी की थी। उसने अस्पताल की गतिविधियों और आने-जाने की व्यवस्था को देखा। इसके बाद स्टाफ से मिलती-जुलती ड्रेस पहनकर अस्पताल पहुंची और खुद को कर्मचारी बताया। नवजात को लेकर निकलने के बाद उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए लगातार कई वाहनों का सहारा लिया।
जांच में सामने आया कि आरोपी महिला अस्पताल से निकलकर ई-रिक्शा से घंटाघर पहुंची। वहां से बस के जरिए छुटमलपुर होते हुए भगवानपुर गई। इसके बाद बाइक सवार से लिफ्ट लेकर इमलीखेड़ा पहुंची और वहां से टेंपो के जरिए धनौरी गई। आगे बस से जाने के दौरान पुलिस ने अलग-अलग स्थानों की सीसीटीवी फुटेज को जोड़ना शुरू किया। हरिद्वार जिले के बहादराबाद में एक अस्पताल के बाहर भी महिला नवजात के साथ सीसीटीवी कैमरे में दिखाई दी।
पुलिस ने आरोपी तक पहुंचने के लिए अस्पताल से लेकर विभिन्न मार्गों और स्थानों के करीब 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज के आधार पर उसके आवागमन के रास्ते को जोड़ते हुए पुलिस बहादराबाद तक पहुंची और आखिरकार आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार आरोपी ने नवजात के लिए कपड़े और दूध की बोतल भी खरीदी तथा उसे एक निजी अस्पताल में दिखाया था। वारदात के दौरान उसने मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं किया और अपना मोबाइल घर पर ही छोड़कर आई थी। वहीं, अस्पताल के स्टाफ से मिलती-जुलती जिस ड्रेस का उसने इस्तेमाल किया था, उसे बाद में जला दिया।
पुलिस अब आरोपी महिला के खिलाफ आगे की विधिक कार्रवाई कर रही है।








