लखनऊ। समाजवादी पार्टी के स्थापना दिवस के 34 साल पूरे होने के मौके पर उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी ने सपा पर बड़ा राजनीतिक हमला बोलते हुए उसके 34 साल के सफर को ‘34 पाप’ के रूप में पेश किया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सपा सरकारों के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी की तीन बार प्रदेश में सरकार रही, लेकिन काम कम और कांड ज्यादा दिखाई देते हैं।
पंकज चौधरी ने कहा कि समाजवादी पार्टी का स्थापना दिवस 4 अक्टूबर को मनाया जाता है। उन्होंने सपा सरकारों के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, भर्ती प्रक्रिया, सांप्रदायिक हिंसा और राजनीतिक परिवारवाद से जुड़े कई मामलों का जिक्र करते हुए पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए।
भाजपा की ओर से जारी सूची में सबसे पहले 1994 के रामपुर तिराहा कांड का उल्लेख किया गया। भाजपा ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे लोगों पर पुलिस फायरिंग हुई और महिला आंदोलनकारियों के साथ भी गंभीर घटनाएं सामने आईं। इसके बाद 1995 के लखनऊ गेस्ट हाउस कांड को लेकर सपा पर हमला बोला गया, जिसमें बसपा नेताओं और तत्कालीन पार्टी प्रमुख मायावती पर हमले का आरोप लगाया गया।
भाजपा ने 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों और 2014 के सहारनपुर दंगों को भी सपा सरकार के कार्यकाल की बड़ी घटनाओं में शामिल किया। इसके अलावा पत्रकार जगेंद्र सिंह हत्याकांड, आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन, 2016 के जवाहरबाग कांड, बुलंदशहर हाईवे गैंगरेप और बदायूं कांड का भी जिक्र किया गया।
भाजपा ने पूर्व मंत्री आजम खान से जुड़े विवादों को भी अपने आरोपों में शामिल किया। बुलंदशहर मामले पर दिए गए उनके कथित बयान, मुजफ्फरनगर दंगे की जांच के दौरान पुलिस पर कथित दबाव और जल निगम भर्ती मामले को लेकर भी सपा पर निशाना साधा गया।
आर्थिक और प्रशासनिक मामलों को लेकर भाजपा ने गोमती रिवरफ्रंट परियोजना, यादव सिंह प्रकरण, लैपटॉप वितरण, बेरोजगारी भत्ता, गन्ना किसानों के भुगतान, जेपीएनआईसी परियोजना और अन्य मामलों का उल्लेख किया। पार्टी ने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान कई योजनाओं में वित्तीय अनियमितताएं और नियमों की अनदेखी हुई।
भर्ती और शिक्षा से जुड़े मामलों को लेकर भी भाजपा ने सपा सरकार को घेरा। 72,825 शिक्षक भर्ती, यूपीपीसीएस प्रारंभिक परीक्षा पेपर लीक, जल निगम भर्ती और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से जुड़े विवादों का उल्लेख करते हुए पार्टी ने तत्कालीन सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। भाजपा ने आरोप लगाया कि कई भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं के कारण युवाओं को लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।
भाजपा ने परिवारवाद और राजनीतिक वर्चस्व के आरोप भी लगाए। डिंपल यादव की निर्विरोध लोकसभा जीत, यादव परिवार के कई सदस्यों का चुनाव जीतना और 2016 में अखिलेश यादव तथा शिवपाल यादव के बीच पार्टी और सरकार को लेकर हुए विवाद को भी भाजपा ने अपने ‘34 पाप’ में शामिल किया।
इसके अलावा कैराना से कथित पलायन, यश भारती पुरस्कारों में भाई-भतीजावाद, यूपीपीएससी में जातीय पक्षपात के आरोप, कौमी एकता दल के सपा में विलय की कोशिश, 2017 में कांग्रेस के साथ गठबंधन और एससी-एसटी पदोन्नति आरक्षण विधेयक के विरोध जैसे मुद्दों को भी भाजपा ने सूची में जगह दी।
भाजपा ने दलित उत्पीड़न और दलित लेखक कंवल भारती की गिरफ्तारी के मामले को भी सपा सरकार के खिलाफ अपने आरोपों में शामिल किया। हालांकि, भाजपा द्वारा गिनाए गए ये सभी बिंदु राजनीतिक आरोप और पार्टी का पक्ष हैं। इनमें से कई मामलों को लेकर अलग-अलग समय पर न्यायिक जांच, प्रशासनिक जांच और राजनीतिक विवाद हुए हैं।
सपा के 34वें स्थापना दिवस पर भाजपा का यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। ऐसे में भाजपा द्वारा सपा सरकार के पुराने कार्यकाल को मुद्दा बनाना आगामी चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अब देखना होगा कि समाजवादी पार्टी भाजपा के इन आरोपों का किस तरह जवाब देती है।








