शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। गोपाल नगर, नुमाइश कैंप में सुपर क्लब (रजि.) के तत्वावधान में आयोजित 33वें रामलीला एवं दशहरा महोत्सव में कुंभकर्ण जागरण और वध लीला का प्रभावशाली मंचन किया गया। कलाकारों के सशक्त अभिनय, आकर्षक संवादों और युद्ध के जीवंत दृश्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भगवान श्रीराम के बाणों से कुंभकर्ण के धराशायी होते ही रामलीला पंडाल जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।
शंकर सौदाई के निर्देशन में मंचित लीला में दिखाया गया कि रामसेना के हाथों लंका की सेना को लगातार मिल रही पराजय से परेशान रावण अपने महाबली भाई कुंभकर्ण को गहरी नींद से जगवाता है। जागने के बाद युद्ध की परिस्थितियों का पता चलने पर कुंभकर्ण रणभूमि में पहुंचता है और रामसेना पर प्रहार कर खलबली मचा देता है। इसके बाद भगवान श्रीराम और कुंभकर्ण के बीच भीषण युद्ध होता है। अंततः प्रभु श्रीराम के बाणों से कुंभकर्ण का वध हो जाता है। इस दृश्य पर दर्शकों ने जयकारे लगाकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
लीला के माध्यम से संदेश दिया गया कि अहंकार, अधर्म और अन्याय चाहे कितने ही शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः सत्य और धर्म की विजय होती है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे पूर्व भाजपा सांसद राघव लखनपाल शर्मा ने कहा कि प्रभु श्रीराम का स्मरण करने से मनुष्य को ऊर्जा मिलती है और उसके भीतर सकारात्मकता एवं रचनात्मकता का संचार होता है। क्लब की ओर से उन्हें स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
मंचन में कुशाग्र नैब ने श्रीराम, अक्षय सूरी ने लक्ष्मण, अनुभव कत्याल ने हनुमान और अमन कालड़ा ने विभीषण की भूमिका निभाई। नितिन खुराना ने रावण, विपिन टुटेजा ने कुंभकर्ण और मन्नी सूरी ने मेघनाद का अभिनय किया। वहीं, वंश ने अंगद की भूमिका निभाई। कुंभकर्ण को जगाने पहुंचे हास्य कलाकार जंग बहादुर जंगी ने अपने अभिनय से दर्शकों को खूब हंसाया। तेजस कालड़ा, सुजल सूरी, तरुण, साज खुराना और संकल्प चावला ने भी अपनी भूमिकाओं से दर्शकों का मनोरंजन किया।
लीला का संचालन अनिल रसवंत ने किया। क्लब अध्यक्ष राकेश सूरी, ईश पुजानी, कर्ण सिंह मैगी, विक्की आहूजा, दीपक गगनेजा, गगन नागपाल और पंकज मिड्ढा सहित अन्य पदाधिकारियों ने आयोजन को व्यवस्थित बनाने में सहयोग दिया। रामलीला देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।








