शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही आतिशबाजी के कारोबार में तेजी आने लगी है। सहारनपुर इस कारोबार का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जहां तमिलनाडु के शिवकाशी से हर साल करीब 15 से 20 करोड़ रुपये की आतिशबाजी आती है। यहां भंडारण के बाद इसकी सप्लाई पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश तक की जाती है। त्योहार को देखते हुए प्रशासन ने आतिशबाजी बनाने और उसका भंडारण करने वाले लाइसेंसधारियों की जांच की तैयारी शुरू कर दी है।
जिले में आतिशबाजी निर्माण और भंडारण से जुड़े लाइसेंस बड़ी संख्या में हैं। अधिकारियों के अनुसार, अलग-अलग श्रेणियों के लाइसेंस के तहत भंडारण क्षमता 400 किलोग्राम से लेकर दो लाख किलोग्राम तक है। हालांकि, आतिशबाजी का कारोबार करने वालों को निर्धारित मानकों, सुरक्षा नियमों और लाइसेंस की शर्तों का पालन करना जरूरी है। जिले से दूसरे राज्यों में आतिशबाजी ले जाने पर खरीद की रसीद होना भी आवश्यक है।
एनसीआर में प्रतिबंध के बाद बढ़ा कारोबार
पश्चिमी यूपी के जिलों से सहारनपुर की ओर बढ़ा रुझान
पिछले कुछ वर्षों में आतिशबाजी के लाइसेंस की संख्या बढ़ने के पीछे आसपास के क्षेत्रों में लागू प्रतिबंधों को भी एक वजह माना जा रहा है। मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, बुलंदशहर, बागपत और हापुड़ जैसे जिले एनसीआर क्षेत्र में आते हैं, जहां प्रदूषण नियंत्रण संबंधी आदेशों के कारण आतिशबाजी पर प्रतिबंध या पाबंदियां लागू हो सकती हैं। ऐसे में सहारनपुर में आतिशबाजी के कारोबार और भंडारण से जुड़ी गतिविधियां महत्वपूर्ण हो गई हैं।
निर्माण के लिए 55 लाइसेंस, भंडारण के 60
जिले में दो बड़े मैगजीन भंडारण लाइसेंस भी
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिले में आतिशबाजी तैयार करने के 55 लाइसेंस हैं। इनके तहत लाइसेंसधारक एक बार में अधिकतम 15 किलोग्राम तक निर्धारित मसाला तैयार कर सकते हैं। निर्धारित मात्रा समाप्त होने के बाद ही नियमों के अनुसार अगली खेप तैयार की जा सकती है। तय सीमा से अधिक मसाला तैयार करना मानकों का उल्लंघन माना जाएगा।
इसके अलावा आतिशबाजी भंडारण के 60 लाइसेंस हैं। इनकी क्षमता अलग-अलग है। अधिकतर लाइसेंस 450 और 600 किलोग्राम तक आतिशबाजी रखने की अनुमति देते हैं। जिले में मैगजीन भंडारण के दो लाइसेंस भी हैं, जिनकी क्षमता दो लाख किलोग्राम तक बताई गई है। भंडारण की वास्तविक सीमा संबंधित लाइसेंस में निर्धारित क्षमता के अनुसार ही होगी।
सहारनपुर में बनती है फुलझड़ी और अनार
अन्य प्रमुख पटाखे शिवकाशी से मंगाए जाते हैं
जिले में लाइसेंस प्राप्त निर्माणकर्ता मुख्य रूप से फुलझड़ी और अनार तैयार करते हैं। रॉकेट, पटाखों की माला, ग्राउंड स्पिनर, बम और अन्य किस्मों की आतिशबाजी का बड़ा हिस्सा तमिलनाडु के शिवकाशी से आता है। यहां आने वाले माल को निर्धारित गोदामों में रखा जाता है और फिर मांग के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में भेजा जाता है।
जांच के लिए चार सदस्यीय टीम गठित
अस्थायी लाइसेंस तीन दिन के लिए जारी होंगे
सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह ने बताया कि त्योहारों के दौरान आतिशबाजी का निर्माण करने वाले और भंडारण करने वाले लाइसेंसधारियों के प्रतिष्ठानों की जांच के लिए चार सदस्यीय टीम गठित कर दी गई है। उन्होंने कहा कि अस्थायी लाइसेंस तीन दिन के लिए जारी किए जाएंगे। मानकों, सुरक्षा दूरी और अन्य निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की इस व्यवस्था का उद्देश्य त्योहार के दौरान आतिशबाजी के कारोबार पर निगरानी रखना और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना है। लाइसेंसधारियों को निर्धारित क्षमता से अधिक माल रखने और नियमों के विपरीत निर्माण करने से बचना होगा।








