शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। नगर निगम में शामिल 32 गांवों के श्मशान घाटों की बदहाली दूर करने की तैयारी शुरू हो गई है। बरसात के दौरान कई गांवों में अंतिम संस्कार के लिए लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा था। कहीं श्मशान घाट तक जाने वाले रास्ते खराब हैं तो कहीं दाह संस्कार के लिए बनी छतरी जर्जर हालत में है। इन समस्याओं को देखते हुए नगर निगम ने सभी 32 गांवों के श्मशान घाटों का सर्वे कराकर आवश्यक सुविधाएं विकसित करने का निर्णय लिया है।
जनता रोड स्थित गांव चक हरेटी के श्मशान घाट तक जाने वाला मार्ग बदहाल है। यहां अंतिम संस्कार के लिए बनी टिनशेड भी जर्जर हो चुकी है और कई स्थानों से गलकर गिर गई है। बरसात के दिनों में छतरी की खराब हालत के कारण अंतिम संस्कार करने में परेशानी हुई थी। इसको लेकर स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम पर श्मशान घाट की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया था।
इसी तरह वार्ड आठ के गांव बिशनपुर में शकलापुरी मार्ग स्थित श्मशान घाट की स्थिति भी खराब है। स्थानीय लोगों ने कई बार नगर निगम से सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की, लेकिन समस्या का समाधान नहीं होने पर ग्रामीणों ने खुद चंदा एकत्र कर सुधार कार्य शुरू करने का निर्णय लिया। ग्रामीणों की ओर से कुछ कार्य कराए भी गए हैं।
मढ़ सहित अन्य गांवों के श्मशान घाटों पर भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। कई स्थानों पर दाह संस्कार के लिए छतरी नहीं है। पेयजल के लिए हैंडपंप, लोगों के बैठने के लिए सीमेंट की कुर्सियां और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। अधिकांश जगह श्मशान घाट तक जाने वाले रास्ते कच्चे हैं। बरसात में इन रास्तों से शव यात्रा ले जाने में फिसलने का खतरा बना रहता है। वहीं, छतरी नहीं होने से बारिश के दौरान अंतिम संस्कार करना भी मुश्किल हो जाता है।

महापौर डॉ. अजय कुमार सिंह ने बताया कि नगर निगम की ओर से पहले भी कई श्मशान घाटों में सुधार कार्य कराए गए हैं। 32 गांवों में कुछ स्थानों से श्मशान घाटों की बदहाली की शिकायतें मिल रही थीं। इन्हें देखते हुए नगर निगम में शामिल सभी 32 गांवों के श्मशान घाटों के सुदृढ़ीकरण का निर्णय लिया गया है। सर्वे के आधार पर वहां जरूरी सुविधाएं विकसित कराई जाएंगी।








