चंद्र ग्रहण और भद्रा के साये में होली: 2 मार्च को होगा होलिका दहन, 4 मार्च को खेली जाएगी रंगों की होली

चंद्र ग्रहण और भद्रा के साये में होली: 2 मार्च को होगा होलिका दहन, 4 मार्च को खेली जाएगी रंगों की होली

होली पर्व को लेकर इस वर्ष लोगों के मन में संशय की स्थिति बनी हुई है। फाल्गुन पूर्णिमा तिथि दो दिन पड़ने तथा चंद्र ग्रहण और भद्राकाल के संयोग के कारण होलिका दहन और रंगों वाली होली की तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। ज्योतिषाचार्यों एवं धर्म शास्त्रों के अनुसार वर्ष 2026 में 2 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को रंगों की होली खेली जाएगी।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलिका दहन के लिए प्रदोष काल, पूर्णिमा तिथि और भद्राकाल रहित समय का विशेष महत्व होता है। यदि पूर्णिमा तिथि पर ग्रहण का योग बन रहा हो तो उससे पूर्व रात्रि में भद्रा रहित अथवा भद्रा पुच्छ काल में होलिका दहन करना शास्त्र सम्मत माना गया है।

पूर्णिमा तिथि और ग्रहण का समय

हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 की शाम 5 बजकर 45 मिनट से प्रारंभ होकर 3 मार्च की शाम 5 बजे तक रहेगी। 3 मार्च को वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण दोपहर 3 बजकर 22 मिनट से शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा, जो भारत में दिखाई देगा। ग्रहण से 9 घंटे पूर्व सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा। सूतक एवं ग्रहण काल में शुभ कार्य व पर्वोत्सव करना वर्जित माना जाता है। इसी कारण 4 मार्च को रंगों की होली मनाना अधिक उचित रहेगा।

भद्राकाल और होलिका दहन का मुहूर्त

पंचांग के अनुसार 2 मार्च की शाम से भद्राकाल प्रारंभ होकर 3 मार्च की प्रातः तक रहेगा। शास्त्रों में भद्रा मुख को त्याज्य और भद्रा पुच्छ को शुभ माना गया है। 2 मार्च की रात्रि 11 बजकर 53 मिनट से 1 बजकर 26 मिनट तक भद्रा पुच्छ काल रहेगा। इस अवधि में होलिका दहन करना शुभ और शास्त्र सम्मत माना गया है। अतः 2 मार्च की रात्रि में भद्रा पुच्छ काल में होलिका दहन किया जाएगा।

होलिका दहन की पूजा विधि

होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा की रात्रि में किया जाता है। पूजा के समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके भगवान नृसिंह एवं भक्त प्रह्लाद का स्मरण किया जाता है। होलिका में दूध, शुद्ध जल, चंदन, अक्षत, फल-फूल एवं मिठाई अर्पित की जाती है। नई फसल के जौ और गेहूं की बालियां, उपले और लकड़ियां अग्नि में समर्पित की जाती हैं। ‘होलिकायै नमः’ मंत्र का जाप करते हुए होलिका की परिक्रमा कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

इस प्रकार चंद्र ग्रहण और भद्राकाल के विशेष संयोग के बीच इस वर्ष 2 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को धूमधाम से रंगों की होली मनाई जाएगी।

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