सहारनपुर: अक्षय तृतीया पर परशुराम जयंती धूमधाम से मनाई, स्वामी कालेंद्रानंद बोले— धर्म स्थापना के लिए हुआ था अवतार

सहारनपुर के राधा विहार स्थित महाशक्ति वैष्णवी महाकाली मंदिर में अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती धूमधाम से मनाई गई। स्वामी कालेंद्रानंद महाराज ने कहा कि भगवान परशुराम का अवतार धर्म की स्थापना और अधर्म के नाश के लिए हुआ था।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर राधा विहार स्थित महाशक्ति वैष्णवी महाकाली मंदिर में भगवान परशुराम जयंती श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा, जहां श्रद्धालुओं ने भगवान परशुराम के चित्र पर पुष्प अर्पित कर पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना की।

कार्यक्रम का आयोजन श्री रामकृष्ण विवेकानंद संस्थान के तत्वावधान में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पूजा-अर्चना का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पंडित ऋषभ शर्मा द्वारा विधिवत कराया गया। पूरे कार्यक्रम के दौरान भक्ति संगीत और धार्मिक अनुष्ठानों ने वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया।

इस अवसर पर प्रवचन देते हुए स्वामी कालेंद्रानंद महाराज ने भगवान परशुराम के जीवन और उनके अवतार के उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर पाप और अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान स्वयं किसी न किसी रूप में अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं। भगवान परशुराम का अवतार भी इसी उद्देश्य से हुआ था।

स्वामी कालेंद्रानंद महाराज ने बताया कि भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है, जिन्होंने अत्याचार और अधर्म के विरुद्ध संघर्ष कर समाज में धर्म की पुनर्स्थापना की। उन्होंने कहा कि परशुराम जी केवल एक योद्धा ही नहीं, बल्कि एक महान तपस्वी और धर्म के संरक्षक भी थे। उनके जीवन से हमें सत्य, साहस और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।

उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि भगवान परशुराम ने पृथ्वी पर बढ़ते अत्याचार को समाप्त करने के लिए कई बार युद्ध किए और धर्म की रक्षा की। उनका उद्देश्य किसी का अहित करना नहीं था, बल्कि समाज में संतुलन और न्याय स्थापित करना था। इसलिए उनका अवतार मानवता के कल्याण के लिए हुआ।

अक्षय तृतीया के महत्व पर प्रकाश डालते हुए स्वामी जी ने कहा कि यह तिथि अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन किया गया दान, जप और तप कई गुना फलदायी होता है। उन्होंने बताया कि इस दिन लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता का संचार होता है।

कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भगवान से अपने परिवार की खुशहाली और समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली, जहां हर कोई भक्ति में लीन नजर आया।

इस मौके पर पंडित योगेश तिवारी, रमेश चंद शर्मा, राजेंद्र दीवान, ज्ञानेंद्र पुंडीर, विभा, गीता, पूनम सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर धार्मिक आयोजन को सफल बनाया और सामाजिक समरसता का संदेश दिया।

अंत में प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। श्रद्धालुओं ने इस आयोजन को आत्मिक शांति और प्रेरणा देने वाला बताया।

यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि समाज में धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का संदेश भी देता नजर आया।

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