स्वामी तुरीयानन्द महाराज निर्वाण दिवस 2026: सहारनपुर आश्रम में भव्य आयोजन, हजारों श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

सहारनपुर के सिद्धपीठ स्वामी तुरीयानन्द आश्रम में 55वां निर्वाण दिवस श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। स्वामी विवेकानन्द गिरि जी महाराज के प्रवचनों और भंडारे में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर, । सिद्धपीठ स्वामी तुरीयानन्द सत्संग सेवा आश्रम, मण्डी समिति रोड, कृष्णा नगर में आद्य सतगुरू श्रीश्री 1008 स्वामी तुरीयानन्द महाराज का 55वां निर्वाण दिवस अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरे आश्रम परिसर में आध्यात्मिक वातावरण छाया रहा।

कार्यक्रम का आयोजन गद्दीनशीन श्रीश्री 1008 स्वामी विवेकानन्द गिरि जी महाराज के सानिध्य में हुआ, जिन्होंने अपने प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, आस्था और जीवन के गूढ़ सिद्धांतों का संदेश दिया। प्रातःकाल कार्यक्रम की शुरुआत पंडित दीपक अग्निहोत्री द्वारा विधि-विधान से हवन-यज्ञ के साथ की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य अर्जित किया।

अपने प्रवचन में स्वामी विवेकानन्द गिरि जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और भक्तों के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि ईश्वर सच्चे मन से की गई पुकार अवश्य सुनते हैं। उन्होंने द्रोपदी चीरहरण प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब तक मनुष्य अपने अहंकार को छोड़कर पूर्ण समर्पण के साथ भगवान को नहीं पुकारता, तब तक उसे ईश्वर की कृपा प्राप्त नहीं होती। उन्होंने कहा कि जब द्रोपदी ने पूरी तरह स्वयं को भगवान के हवाले कर दिया, तभी श्रीकृष्ण ने उसकी रक्षा की।

उन्होंने आगे कहा कि जीवन में सच्चा मित्र वही होता है, जो बिना किसी अपेक्षा के कठिन समय में साथ खड़ा हो। उन्होंने उद्धव और श्रीकृष्ण के संवाद का उदाहरण देते हुए कर्म के सिद्धांत को समझाया और कहा कि इस सृष्टि में हर व्यक्ति अपने कर्मों के अनुसार फल प्राप्त करता है। परमात्मा केवल साक्षी के रूप में उपस्थित रहते हैं और हर क्षण हमारे कर्मों को देखते हैं।

स्वामी जी ने श्रद्धालुओं को समझाते हुए कहा कि जब व्यक्ति का विश्वास इस स्तर तक पहुंच जाता है कि वह हर स्थिति में ईश्वर की उपस्थिति को महसूस करता है, तब वह गलत कार्यों से स्वयं को दूर रखता है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य माया में उलझकर ईश्वर को भूल जाता है, तब जीवन में कठिनाइयां बढ़ती हैं, लेकिन यदि वह सच्चे मन से भक्ति करता है तो उसका जीवन सरल और सफल हो जाता है।

इस अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें दूर-दराज से आए हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे में अनुशासन और सेवा भावना का अद्भुत उदाहरण देखने को मिला, जहां स्वयंसेवकों ने श्रद्धालुओं की सेवा में कोई कमी नहीं छोड़ी।

कार्यक्रम में ट्रस्ट के प्रधान ओम प्रकाश अरोड़ा, उपप्रधान महेन्द्र पाल ढल्ल, महासचिव प्रवीण वधावन, कोषाध्यक्ष अमित वत्ता, संयुक्त सचिव सुभाष चंद मल्होत्रा, सुदर्शन बजाज सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी ने स्वामी तुरीयानन्द महाराज के जीवन और उनके आध्यात्मिक योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।

पूरे आयोजन के दौरान आश्रम परिसर भक्ति रस में डूबा रहा और श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन, सत्संग और धार्मिक अनुष्ठानों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम ने न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया, बल्कि लोगों को जीवन में सकारात्मक सोच और आस्था के महत्व का संदेश भी दिया।

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