शहरी चौपाल ब्यूरो
देवबंद (सहारनपुर)। सहारनपुर जनपद के पिलखनी स्थित शेखुल हिंद मेडिकल कॉलेज का नाम बदलने की सिफारिश को लेकर सियासत लगातार गरमाती जा रही है। समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक मनोज चौधरी द्वारा दिए गए बयान के बाद अब धार्मिक और सामाजिक संगठनों में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। शुक्रवार को देवबंद में उलमा की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें उनके बयान की कड़े शब्दों में निंदा की गई।
ईदगाह रोड स्थित दारुल उलूम अशरफिया में आयोजित इस बैठक में विभिन्न धार्मिक संस्थाओं के प्रमुख और उलमा मौजूद रहे। बैठक की अध्यक्षता करते हुए संस्था के मोहतमिम मौलाना सालिम अशरफ कासमी ने कहा कि मौलाना महमूद हसन देवबंदी देश के महान स्वतंत्रता सेनानी थे और उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि ऐसे महान व्यक्तित्व के नाम पर स्थापित मेडिकल कॉलेज का नाम बदलने की बात करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
मौलाना कासमी ने आगे कहा कि यह केवल एक नाम का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और उसमें योगदान देने वाले महान लोगों के सम्मान से जुड़ा विषय है। ऐसे में किसी भी राजनीतिक बयानबाजी के तहत इस तरह के प्रस्ताव रखना समाज में गलत संदेश देता है।
बैठक में मौजूद मदरसा जामिया कासमिया दारुत्तालीम व सना के मोहतमिम मौलाना इब्राहिम कासमी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मनोज चौधरी को यह जानकारी होनी चाहिए कि मेडिकल कॉलेज का नाम समाजवादी पार्टी के शासनकाल में ही शेखुल हिंद के नाम पर रखा गया था। ऐसे में उसी पार्टी से जुड़े नेता द्वारा नाम बदलने की सिफारिश करना न केवल विरोधाभासी है, बल्कि यह पार्टी की विचारधारा पर भी सवाल खड़ा करता है।
शेखुल हिंद एकेडमी के चेयरमैन हाजी रियाज महमूद, जो मौलाना महमूद हसन देवबंदी के नवासे भी हैं, ने कहा कि जो लोग खुद को मुस्लिमों का हितैषी बताते हैं, वही आज मुस्लिम महापुरुषों के सम्मान को ठेस पहुंचाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज इस प्रकार के बयानों को कभी स्वीकार नहीं करेगा और इसका विरोध जारी रहेगा।
उलमा ने एक स्वर में कहा कि यह केवल धार्मिक भावना का मामला नहीं, बल्कि देश के इतिहास और गौरव से जुड़ा विषय है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह के बयानों पर रोक नहीं लगी तो समाज में असंतोष बढ़ सकता है।
बैठक में मौलाना मुजतबा, मोहम्मद ताज, मौलाना कलीम, मौलाना मुजीब, राशिद अहमद, कबीर सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने एकमत होकर कहा कि शेखुल हिंद मेडिकल कॉलेज का नाम किसी भी स्थिति में नहीं बदला जाना चाहिए और इस मुद्दे पर समाज एकजुट होकर आवाज उठाएगा।
उल्लेखनीय है कि पूर्व विधायक मनोज चौधरी ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान मेडिकल कॉलेज का नाम सम्राट मिहिर भोज के नाम पर रखने की वकालत की थी, जिसके बाद यह विवाद गहराता जा रहा है। अब इस मामले में उलमा और धार्मिक संगठनों की खुलकर प्रतिक्रिया सामने आने के बाद सियासी माहौल और भी गर्म हो गया है।








