सहारनपुर अंबाला रोड ‘रुतबा’ बैंक्वेट हॉल घोटाला: फर्जी दस्तावेजों पर खड़ा साम्राज्य, 4 आरोपियों पर मुकदमा दर्ज

सहारनपुर के अंबाला रोड स्थित ‘रुतबा’ बैंक्वेट हॉल में फर्जी दस्तावेजों और नियमों की अनदेखी का बड़ा मामला सामने आया है। कुतुबशेर थाने में 4 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज, जांच जारी।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। शहर के अंबाला रोड स्थित चर्चित ‘रुतबा’ बैंक्वेट हॉल अब विवादों के केंद्र में आ गया है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किए गए इस भव्य निर्माण के पीछे नियमों की अनदेखी और फर्जी दस्तावेजों का बड़ा खेल सामने आने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है। मामले में थाना कुतुबशेर थाना में संचालक समेत चार लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

बताया जा रहा है कि ‘रुतबा’ नाम से खड़ा यह बैंक्वेट हॉल लंबे समय से अपने आलीशान ढांचे और बड़े आयोजनों के लिए जाना जाता था, लेकिन अब इसी चमक-धमक के पीछे छिपे कथित फर्जीवाड़े ने इसे कानूनी संकट में ला खड़ा किया है। जांच में सामने आया है कि निर्माण कार्य के दौरान कई आवश्यक नियमों की अनदेखी की गई और संबंधित विभागों से अनुमति लेने के लिए कथित तौर पर गलत दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।

सूत्रों के अनुसार, फायर सेफ्टी से लेकर विकास प्राधिकरण की मंजूरी तक में अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। आरोप है कि संबंधित विभागों को गुमराह कर आवश्यक एनओसी हासिल की गई या फिर नियमों को दरकिनार करते हुए निर्माण कार्य जारी रखा गया। इस पूरे मामले में यह भी चर्चा रही कि संचालकों द्वारा लंबे समय तक अपने प्रभाव और आर्थिक ताकत का इस्तेमाल कर सिस्टम को प्रभावित करने के दावे किए जाते रहे।

पुलिस द्वारा दर्ज मुकदमे में लविश पोपली को मुख्य भूमिका में बताया जा रहा है, जिनका नाम आरोपियों की सूची में प्रमुखता से शामिल है। वहीं रईस मलिक और ईश्वर गांधी का नाम भी इस मामले में सामने आया है, जबकि एक अज्ञात व्यक्ति को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस निर्माण को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठाए गए थे, लेकिन प्रभावशाली लोगों के चलते कार्रवाई नहीं हो पाई। अब जब मुकदमा दर्ज हुआ है तो लोगों को उम्मीद है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, मुख्य आरोपी रईस मलिक फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं और उनकी तलाश के लिए दबिश दी जा रही है। वहीं अन्य आरोपियों से पूछताछ की प्रक्रिया भी जारी है। जांच एजेंसियां दस्तावेजों की वैधता, निर्माण की स्वीकृतियों और आर्थिक लेनदेन से जुड़े पहलुओं की भी गहन जांच कर रही हैं।

इस मामले के सामने आने के बाद शहर में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या प्रभाव और पैसे के दम पर नियमों को नजरअंदाज करने का सिलसिला अब खत्म होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मामले में निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई होती है तो यह शहर में अवैध निर्माण और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा संदेश होगा।

फिलहाल प्रशासन की अगली कार्रवाई और जांच के अंतिम निष्कर्ष पर सभी की निगाहें टिकी हैं। ‘रुतबा’ बैंक्वेट हॉल का यह मामला अब केवल एक निर्माण विवाद नहीं, बल्कि सिस्टम की पारदर्शिता और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है।

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