फैय्याज अली आब्दी
नानौता (सहारनपुर)। हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और कर्बला के शहीदों की याद में मनाए जाने वाले अरबईन (चेहलुम) के अवसर पर नानौता नगर में धार्मिक आयोजनों का सिलसिला शुरू हो गया है। नगर की विभिन्न इमामबारगाहों में आयोजित मजलिसों में उलमा ने कर्बला की शहादत के संदेश पर प्रकाश डालते हुए इंसाफ, मानवता, त्याग और सत्य के मार्ग पर चलने की सीख दी। चेहलुम को लेकर नगर में धार्मिक माहौल बना हुआ है और अकीदतमंद बड़ी संख्या में मजलिसों में शामिल हो रहे हैं।
शुक्रवार देर रात इमामबारगाह असद अली छत्ता में आयोजित पहली मजलिस को आजमगढ़ से आए मौलाना आरिफ अब्बास ने संबोधित किया। उन्होंने कर्बला के ऐतिहासिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी पूरी मानवता के लिए सत्य, न्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष का अमर संदेश है।
शनिवार को इमामबारगाह मासूमा बेगम छुम्मा में आयोजित मजलिस में मास्टर सदाकत हुसैन ने सोज़ो-सलाम पेश किया, जबकि सैय्यद अली मियां करबलाई ने मरसियाख्वानी की। मुख्य वक्ता जव्वादिया अरबी कॉलेज, बनारस के प्राचार्य मौलाना सैय्यद जमीरुल हसन ने कहा कि कर्बला का पैगाम इंसाफ, अमन और इंसानियत का पैगाम है। उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन की शहादत हर दौर में अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करने की प्रेरणा देती रहेगी।
मजलिस के बाद मोहम्मद कासिम और मोहम्मद हुसैन ने नौहाख्वानी पेश की, जिससे माहौल गमगीन हो गया। इस अवसर पर मौलाना तनवीर आलम, मौलाना मुख्तार हुसैन, हाजी शब्बीर हुसैन, फजल अली, असगर हुसैन, गुलाम कबर, गफ्फार आब्दी, वसीम अख्तर, शौक आब्दी, महमूद अली, रियाज हुसैन सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।
मौलाना तनवीर आलम नानौतवी ने बताया कि चेहलुम तक नगर की विभिन्न इमामबारगाहों में प्रतिदिन मजलिसों का आयोजन होगा। उन्होंने जानकारी दी कि 17 सफर से इमामबारगाह दरबार-ए-हुसैन कोट में मौलाना सैय्यद आबिद रिजवी मजलिसों को संबोधित करेंगे। वहीं 20 सफर (4 अगस्त) और 21 सफर (5 अगस्त) को हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में चेहलुम मनाया जाएगा। इस दौरान नगर की विभिन्न इमामबारगाहों से पारंपरिक जुलूस निकाले जाएंगे, जिनमें नानौता सहित आसपास के क्षेत्रों और दूर-दराज से बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल होंगे।








