शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। श्रावण मास में चल रही कांवड़ यात्रा आगामी दिनों में और अधिक गति पकड़ सकती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 1 अगस्त से 4 अगस्त तक पंचक होने के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु नई कांवड़ यात्रा प्रारंभ करने से परहेज कर रहे हैं। बड़े-बुजुर्गों और विद्वान पंडितों का मानना है कि पंचक समाप्त होने के बाद शिवभक्त बड़ी संख्या में हरिद्वार और अन्य गंगाघाटों की ओर प्रस्थान करेंगे, जिससे कांवड़ यात्रा अपने चरम पर पहुंच सकती है।
इसी संभावित भीड़ को देखते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में 5 अगस्त से स्कूलों में अवकाश घोषित किए जाने की चर्चा भी तेज है। हालांकि, अभी तक राज्य सरकार या संबंधित जिला प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कांवड़ यात्रा के दौरान स्थानीय परिस्थितियों, यातायात व्यवस्था और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक निर्णय लिया जाएगा।

धार्मिक विद्वानों के अनुसार पंचक का विशेष महत्व हिंदू धर्मग्रंथों में बताया गया है। पंचक उस अवधि को कहा जाता है जब चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के अंतिम चरण से लेकर रेवती नक्षत्र तक रहता है। गरुड़ पुराण, धर्मसिंधु, निर्णय सिंधु और मुहूर्त ग्रंथों में पंचक के दौरान कुछ कार्यों को टालने की परंपरा का उल्लेख मिलता है। हालांकि सभी कार्य वर्जित नहीं होते, लेकिन कई परिवार और श्रद्धालु नई यात्रा, गृह निर्माण, छत डालने, लकड़ी संग्रह तथा कुछ विशेष मांगलिक कार्यों से बचते हैं।
विद्वान पंडितों का कहना है कि पंचक के संबंध में अलग-अलग परंपराएं और मान्यताएं भी प्रचलित हैं। कांवड़ यात्रा के संदर्भ में भी अनेक श्रद्धालु पंचक समाप्त होने के बाद यात्रा प्रारंभ करना अधिक शुभ मानते हैं। यही कारण है कि हर वर्ष पंचक समाप्त होने के बाद हरिद्वार, ऋषिकेश और गंगाघाटों पर शिवभक्तों की संख्या में अचानक वृद्धि देखने को मिलती है।
सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली और मेरठ से होकर गुजरने वाले कांवड़ मार्ग पर भी प्रशासन ने भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को मजबूत करना शुरू कर दिया है। पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, नगर निकाय और प्रशासनिक टीमें लगातार कांवड़ मार्ग का निरीक्षण कर रही हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
धर्माचार्यों का यह भी कहना है कि भगवान शिव की आराधना में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा, संयम और नियम हैं। यदि किसी कारणवश पंचक में यात्रा करनी पड़े तो स्थानीय परंपरा और योग्य आचार्य के मार्गदर्शन का पालन करना उचित माना जाता है। वहीं अनेक विद्वानों का यह भी मत है कि भगवान शिव की भक्ति में सच्ची श्रद्धा सर्वोपरि है और पंचक संबंधी मान्यताओं का पालन व्यक्ति अपनी पारिवारिक परंपरा एवं धार्मिक विश्वास के अनुसार करता है।
इधर अभिभावकों की नजर भी स्कूलों में संभावित अवकाश पर टिकी हुई है। कांवड़ मार्ग पर यातायात का दबाव बढ़ने की स्थिति में कई जिलों में पूर्व वर्षों की तरह स्थानीय स्तर पर विद्यालयों में छुट्टी घोषित की जा सकती है। हालांकि फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है, इसलिए अभिभावकों और विद्यार्थियों को केवल प्रशासन द्वारा जारी अधिकृत सूचना पर ही भरोसा करना चाहिए।
प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि कांवड़ यात्रा के दौरान यातायात संबंधी एडवाइजरी का पालन करें, अफवाहों पर ध्यान न दें तथा किसी भी सूचना के लिए केवल सरकारी आदेशों और अधिकृत माध्यमों पर ही विश्वास करें।









