Saharanpur News: कांवड़ शिविर में मुस्लिम पार्षदों ने दिया भाईचारे का संदेश, मंसूर बदर के नेतृत्व में शिवभक्तों का किया स्वागत

सहारनपुर में कांवड़ सेवा शिविर पहुंचे मुस्लिम पार्षदों ने मंसूर बदर के नेतृत्व में शिवभक्तों का स्वागत कर गंगा-जमुनी तहज़ीब, धार्मिक सौहार्द और भाईचारे का संदेश दिया।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। सावन माह की पावन कांवड़ यात्रा के बीच सहारनपुर में धार्मिक सौहार्द, सामाजिक समरसता और गंगा-जमुनी तहज़ीब की एक प्रेरणादायक तस्वीर देखने को मिली। नगर निगम के पार्षद एवं कार्यकारिणी सदस्य मंसूर बदर के नेतृत्व में एक दर्जन से अधिक मुस्लिम पार्षद कांवड़ सेवा शिविर पहुंचे, जहां उन्होंने शिवभक्त कांवड़ियों का पुष्पवर्षा, माल्यार्पण और अभिवादन कर आपसी भाईचारे, प्रेम और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। इस पहल को श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने सहारनपुर की साझा सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण बताया।

कांवड़ सेवा शिविर में पहुंचने पर शिविर संचालकों और आयोजकों ने मंसूर बदर सहित सभी पार्षदों का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान शिवभक्तों के लिए संचालित सेवा कार्यों की जानकारी ली गई तथा भोजन, पेयजल, चिकित्सा और विश्राम जैसी व्यवस्थाओं की सराहना की गई। मुस्लिम पार्षदों ने स्वयं भी कांवड़ियों का स्वागत कर उनके मंगलमय यात्रा की कामना की।

पार्षद मंसूर बदर ने कहा कि सहारनपुर की पहचान सदियों पुरानी गंगा-जमुनी तहज़ीब, आपसी प्रेम और सामाजिक भाईचारे से रही है। यहां सभी धर्मों के लोग एक-दूसरे के पर्व, त्योहार और धार्मिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। उन्होंने कहा कि कांवड़ियों की सेवा करना केवल धार्मिक नहीं बल्कि मानवीय दायित्व भी है। समाज में प्रेम, सहयोग और सम्मान की भावना को मजबूत करना ही सच्ची सेवा है।

उन्होंने कहा कि आज देश और समाज को सबसे अधिक आवश्यकता आपसी विश्वास और सद्भाव की है। जब विभिन्न समुदाय एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करते हैं, तभी सामाजिक समरसता मजबूत होती है। कांवड़ यात्रा जैसे आयोजन केवल धार्मिक आस्था के प्रतीक नहीं बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समन्वय का भी संदेश देते हैं।

इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने कहा कि भारत की विविधता उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। अलग-अलग धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों के लोग जब एक-दूसरे के सुख-दुख और धार्मिक आयोजनों में सहभागी बनते हैं, तभी लोकतंत्र और सामाजिक सौहार्द मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि सहारनपुर हमेशा से सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे की मिसाल रहा है और भविष्य में भी यह परंपरा कायम रहेगी।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने प्रसिद्ध पंक्तियों के माध्यम से भी एकता और भाईचारे का संदेश दिया—

हरदम आपस का ये झगड़ा, मैं भी सोचूँ, तू भी सोच।

कल क्या होगा शहर का नक्शा, मैं भी सोचूँ, तू भी सोच।

एक ख़ुदा के हम बंदे हैं, एक आदम की हम औलाद।

तेरा-मेरा ख़ून का रिश्ता, मैं भी सोचूँ, तू भी सोच।”

शिविर में मौजूद श्रद्धालुओं ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में विश्वास, प्रेम और सामाजिक समरसता को मजबूत करते हैं। कांवड़ियों ने भी मुस्लिम पार्षदों द्वारा किए गए स्वागत और सम्मान के लिए आभार व्यक्त किया। स्थानीय लोगों का कहना था कि सहारनपुर की यही गंगा-जमुनी संस्कृति पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

धार्मिक आस्था, मानव सेवा और सामाजिक सद्भाव का यह दृश्य कांवड़ यात्रा के दौरान सहारनपुर की सकारात्मक पहचान को और मजबूत करता नजर आया।

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