श्री कांत शर्मा
गागलहेड़ी (सहारनपुर)। सावन माह में जहां लाखों शिवभक्त हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर लौट रहे हैं, वहीं गागलहेड़ी कांवड़ मार्ग पर एक ऐसा भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। पंजाब के पटियाला निवासी सोनू और मोनू अपनी 85 वर्षीय वृद्ध माँ (दादी-नानी) को कंधों पर पालकी में बैठाकर हरिद्वार में गंगा स्नान कराने के बाद गंगाजल लेकर लौट रहे हैं। दोनों युवकों की मातृसेवा और समर्पण को देखकर लोग उन्हें आधुनिक युग का ‘कलयुग का श्रवण कुमार’ कहकर सम्मान दे रहे हैं।
कांवड़ मार्ग पर गुजर रहे श्रद्धालु जैसे ही इस दृश्य को देखते हैं, उनके कदम कुछ पल के लिए ठहर जाते हैं। दोनों युवक बारी-बारी से अपनी वृद्ध माँ को कंधों पर उठाकर यात्रा पूरी कर रहे हैं। उनके चेहरे पर थकान नहीं, बल्कि माँ की सेवा का संतोष और भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा साफ दिखाई देती है।

परिजनों ने बताया कि उनकी 85 वर्षीय माँ की लंबे समय से इच्छा थी कि वह हरिद्वार जाकर मां गंगा में स्नान करें और भगवान भोलेनाथ के दर्शन करें। उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए उनके लिए पैदल यात्रा संभव नहीं थी। ऐसे में सोनू और मोनू ने अपनी माँ की इच्छा को सर्वोपरि मानते हुए उन्हें पालकी की तरह विशेष आसन में कंधों पर बैठाकर हरिद्वार पहुंचाया। वहां विधि-विधान से गंगा स्नान कराया और अब गंगाजल लेकर अपने घर लौट रहे हैं।
यात्रा के दौरान राहगीर, कांवड़िए और स्थानीय लोग इस दृश्य को देखकर भावुक हो उठते हैं। कई श्रद्धालु दोनों भाइयों का अभिवादन करते हैं और उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाते हैं। वृद्ध माँ के चेहरे पर भी संतोष, गर्व और खुशी के भाव साफ झलकते हैं। उनके लिए यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि अपने बेटों के स्नेह और समर्पण का जीवंत प्रमाण बन गई है।
सावन और कांवड़ यात्रा के दौरान जहां शिवभक्ति का अद्भुत उत्साह दिखाई देता है, वहीं सोनू और मोनू की यह सेवा यात्रा भारतीय संस्कृति में माता-पिता के सम्मान और सेवा की परंपरा को भी सशक्त संदेश दे रही है। लोगों का कहना है कि आज के दौर में जब परिवारों में रिश्तों की संवेदनाएं कमजोर होती दिखाई देती हैं, ऐसे उदाहरण समाज को नई दिशा देने का कार्य करते हैं।
धार्मिक विद्वानों का मानना है कि भारतीय संस्कृति में माता-पिता की सेवा को सर्वोच्च धर्म माना गया है। पुराणों में वर्णित श्रवण कुमार की कथा आज भी लोगों को प्रेरणा देती है। सोनू और मोनू ने अपने व्यवहार से यह साबित कर दिया कि माता-पिता की सेवा केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सबसे बड़ा पुण्य और सच्ची भक्ति है।गागलहेड़ी कांवड़ मार्ग पर यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आस्था, संस्कार और सेवा का ऐसा संदेश बन गया, जिसकी चर्चा दूर-दूर तक हो रही है।









