शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। श्रावण मास की कांवड़ यात्रा-2026 को सुरक्षित, सुगम और स्वास्थ्य की दृष्टि से व्यवस्थित बनाने के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक इंतजाम किए हैं। जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार के नेतृत्व में पूरे कांवड़ मार्ग पर चिकित्सा सेवाओं का मजबूत नेटवर्क तैयार किया गया है। 30 जुलाई से 11 अगस्त तक संचालित कांवड़ यात्रा के दौरान शिवभक्तों को त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग 24 घंटे अलर्ट मोड पर कार्य कर रहा है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा उत्तराखंड सीमा ढाल्ला चौरा से लेकर हरियाणा सीमा शाहजहांपुर तक पूरे कांवड़ मार्ग पर 22 अस्थायी चिकित्सा शिविर स्थापित किए गए हैं। इन शिविरों में श्रद्धालुओं को प्राथमिक उपचार, आवश्यक दवाइयां और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। किसी भी गंभीर मरीज को तत्काल एम्बुलेंस के माध्यम से जिला चिकित्सालय अथवा राजकीय मेडिकल कॉलेज रेफर करने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।
कांवड़ यात्रा को देखते हुए 47 चिकित्सा अधिकारी, 41 फार्मासिस्ट और 70 अन्य स्वास्थ्य कर्मियों सहित कुल 158 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। सभी चिकित्सा शिविर चौबीसों घंटे संचालित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रतिदिन बड़ी संख्या में कांवड़ियों का प्राथमिक उपचार किया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाया जा रहा है।
आपातकालीन सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए 11 एम्बुलेंस 108 सेवा, पांच सरकारी एम्बुलेंस तथा तीन एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) एम्बुलेंस तैनात की गई हैं। अब तक बुखार, दुर्घटना, मिर्गी के दौरे और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावित कई श्रद्धालुओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराया गया है।

स्वास्थ्य विभाग ने नागरिक सुरक्षा कोर के सहयोग से मोटरसाइकिल एवं स्कूटर पर तैनात वार्डनों के साथ 20 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) की भी ड्यूटी लगाई है, ताकि भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके। इसके अलावा प्रशासन ने कांवड़ मार्ग पर 20 मोटरसाइकिल और ई-रिक्शा आधारित चिकित्सा सहायता इकाइयों की व्यवस्था भी की है, जिससे आपात स्थिति में मरीज तक तुरंत पहुंचा जा सके।
जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कांवड़ियों के उपचार के लिए पांच-पांच बेड का विशेष वार्ड आरक्षित किया गया है, जबकि जिला चिकित्सालय में 20 बेड का अलग वार्ड तैयार किया गया है। सभी चिकित्सा शिविरों में सर्पदंश और कुत्ते के काटने की दवाओं सहित आवश्यक जीवनरक्षक औषधियां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।
रेलवे मार्ग से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सहारनपुर, टपरी, रामपुर मनिहारान और देवबंद रेलवे स्टेशन पर भी चिकित्सा शिविर और एम्बुलेंस तैनात की गई हैं। यहां स्वास्थ्य टीमें चौबीसों घंटे उपलब्ध रहकर जरूरतमंद कांवड़ियों को प्राथमिक उपचार और रेफरल सेवाएं प्रदान कर रही हैं।
पुलिस लाइन स्थित कांवड़ कंट्रोल रूम में भी स्वास्थ्य कर्मियों की 24 घंटे ड्यूटी लगाई गई है। कंट्रोल रूम पर प्राप्त होने वाली स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों और आपातकालीन कॉल का तत्काल निस्तारण कर निकटतम चिकित्सा शिविर या अस्पताल से सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
इसके अलावा कांवड़ मार्ग पर स्थित निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और चिकित्सालयों के साथ भी समन्वय स्थापित किया गया है। प्रशासन ने सभी संस्थानों से आपात स्थिति में सहयोग देने का अनुरोध किया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के सहयोग से भी आवश्यक वार्ड आरक्षित किए गए हैं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर कांवड़ यात्रियों को बिना विलंब उपचार मिल सके।
जिला प्रशासन का कहना है कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और अन्य एजेंसियों के समन्वित प्रयासों से यात्रा मार्ग पर चिकित्सा सेवाओं को पूरी तरह सुदृढ़ बनाया गया है, जिससे लाखों शिवभक्त सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण में अपनी यात्रा पूरी कर सकें।









