शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। नवजात शिशु के स्वस्थ विकास, बेहतर पोषण और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने के लिए जन्म के पहले छह माह तक केवल मां का दूध ही सबसे उपयुक्त आहार माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस अवधि में शिशु को पानी, शहद, घुट्टी, गाय या भैंस का दूध अथवा अन्य कोई खाद्य पदार्थ देने की आवश्यकता नहीं होती। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ भी पहले छह माह तक केवल स्तनपान कराने तथा इसके बाद पूरक आहार के साथ दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने की सलाह देते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार जन्म के तुरंत बाद निकलने वाला पीला और गाढ़ा दूध, जिसे कोलोस्ट्रम कहा जाता है, नवजात शिशु का पहला प्राकृतिक टीका होता है। इसमें मौजूद एंटीबॉडी, विटामिन-ए और अन्य प्रतिरक्षा तत्व शिशु को संक्रमणों से बचाने के साथ उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं। यही कारण है कि सामान्य प्रसव के बाद एक घंटे के भीतर तथा सिजेरियन प्रसव के बाद चार से पांच घंटे के अंदर स्तनपान शुरू कराने की सलाह दी जाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मां का दूध हमेशा स्वच्छ, सुरक्षित, संक्रमण रहित और सही तापमान पर उपलब्ध रहता है। इससे बोतल या पाउडर दूध की आवश्यकता नहीं पड़ती और शिशु में दस्त, निमोनिया, एलर्जी तथा अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है। साथ ही यह बच्चे के मस्तिष्क, तंत्रिका तंत्र और शारीरिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे उसकी सीखने की क्षमता और मानसिक विकास बेहतर होता है।
स्तनपान के लाभ केवल शिशु तक सीमित नहीं हैं। नियमित स्तनपान कराने वाली महिलाओं में स्तन कैंसर, अंडाशय (ओवेरियन) कैंसर, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कम होता है। इसके अलावा स्तनपान के दौरान प्रतिदिन लगभग 400 से 500 कैलोरी ऊर्जा खर्च होती है, जिससे गर्भावस्था के बाद बढ़े वजन को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। यह गर्भाशय को सामान्य स्थिति में लाने और प्रसवोत्तर रक्तस्राव कम करने में भी सहायक होता है।

चिकित्सकों के अनुसार स्तनपान मां और शिशु के बीच भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करता है तथा प्रसवोत्तर अवसाद (पोस्ट पार्टम डिप्रेशन) की संभावना भी कम करता है। मां का दूध न केवल बच्चे को बेहतर पोषण देता है, बल्कि उसके स्वस्थ भविष्य की मजबूत नींव भी रखता है।
स्वास्थ्य विभाग ने विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान सभी गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और उनके परिवारों से अपील की है कि वे स्तनपान को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों से बचें और जन्म के तुरंत बाद स्तनपान शुरू कर पहले छह माह तक केवल मां का दूध ही पिलाएं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ मां, स्वस्थ शिशु और स्वस्थ समाज की आधारशिला सफल एवं नियमित स्तनपान से ही मजबूत होती है।








