शहरी चौपाल ब्यूरो
गागलहेड़ी (सहारनपुर)। श्रावण मास की रिमझिम फुहारों के बीच कांवड़ यात्रा अपने चरम पर पहुंच गई है। गागलहेड़ी से गुजर रहे कांवड़ मार्ग पर “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के गगनभेदी जयघोषों से पूरा वातावरण शिवमय हो उठा। रंग-बिरंगी और आकर्षक कांवड़ों के साथ हजारों शिवभक्त अपने गंतव्य की ओर बढ़ते दिखाई दिए। यात्रा मार्ग पर हर कदम आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।

चंडीगढ़ निवासी अंकित, अमित, कुश, शिवम, मोहित और कृष्ण पहली बार हरिद्वार से गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा कर रहे हैं। उनकी कांवड़ पर भगवान शिव की आकर्षक झांकी सजाई गई है, जिसने राहगीरों और अन्य श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। युवाओं ने बताया कि बाबा भोलेनाथ की कृपा से उन्हें पहली बार इस पावन यात्रा में शामिल होने का अवसर मिला है। उनका कहना है कि यह अनुभव जीवनभर यादगार रहेगा और भविष्य में भी वे कांवड़ यात्रा जारी रखेंगे।

वहीं न्यू चंडीगढ़ निवासी बंटी, तुषार, विक्की और गोविंद अपने साथियों के साथ महाकाल की भव्य झांकी से सुसज्जित कांवड़ लेकर लौट रहे हैं। उनकी कांवड़ पर की गई आकर्षक सजावट और शिवभक्ति से ओत-प्रोत माहौल ने यात्रा मार्ग की रौनक को और बढ़ा दिया। श्रद्धालु उनकी झांकी को देखकर रुक-रुककर तस्वीरें लेते नजर आए।
उधर पंजाब के नवांशहर से आए शिवभक्त लगातार चौथे वर्ष कांवड़ यात्रा में शामिल हुए हैं। संघ के सदस्य साहिल राणा, दिनेश कुमार, कमलदीप, विजय राणा और अंश राणा महाकाल की मनमोहक झांकी के साथ पूरे उत्साह और श्रद्धा से अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक है।
यात्रा मार्ग पर जगह-जगह श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए सेवा शिविर लगाए गए हैं, जहां भोजन, पेयजल और चिकित्सा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। शिवभक्तों का उत्साह, अनुशासन और भक्ति का भाव हर किसी को आकर्षित कर रहा है।
श्रावण मास में निकल रही यह कांवड़ यात्रा सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता और भगवान शिव के प्रति अटूट विश्वास की अनूठी मिसाल बनकर सामने आ रही है। महाकाल की भव्य झांकियों और “बोल बम” के जयघोषों से पूरा कांवड़ मार्ग भक्तिमय वातावरण में सराबोर दिखाई दे रहा है।








