Bihar Teacher Transfer: उर्दू-अरबी-फारसी शिक्षकों के तबादले पर तेजस्वी यादव ने उठाए सवाल, CM को लिखा पत्र

बिहार में सरकारी शिक्षकों के तबादले को लेकर तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा। उर्दू, अरबी और फारसी शिक्षकों की स्थानांतरण सूची की निष्पक्ष समीक्षा, नियमविरुद्ध तबादले रद्द करने और लंबित वेतन भुगतान की मांग की।

 

पटना। बिहार में सरकारी शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर जारी विवाद के बीच विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर तबादला प्रक्रिया की स्वतंत्र और निष्पक्ष समीक्षा कराने की मांग की है। उन्होंने विशेष रूप से उर्दू, अरबी और फारसी विषयों के शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर सामने आ रही शिकायतों का उल्लेख करते हुए सरकार से नियमों के अनुसार दोबारा जांच कराने की मांग की है।

तेजस्वी यादव ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने पत्र को साझा करते हुए कहा कि शिक्षकों के स्थानांतरण की मौजूदा प्रक्रिया को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। उनके अनुसार, उर्दू, अरबी और फारसी विषयों के शिक्षकों को कई विद्यालयों में पर्याप्त छात्र संख्या होने के बावजूद ‘सरप्लस’ यानी अतिरिक्त शिक्षक के रूप में चिह्नित किए जाने की शिकायत मिली है।

उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि स्थानांतरण की पूरी सूची की स्वतंत्र तरीके से समीक्षा कराई जाए और जांच में नियमों के विपरीत पाए जाने वाले तबादलों को रद्द किया जाए। तेजस्वी ने यह भी कहा कि किसी विद्यालय में किसी विषय का केवल एक शिक्षक कार्यरत हो तो उसे ‘सरप्लस’ घोषित करने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।

पांच वर्ष से कम सेवा वाले शिक्षकों का भी उठाया मुद्दा

राजद नेता ने अपने पत्र में दावा किया कि स्थानांतरण सूची में ऐसे शिक्षकों के नाम भी सामने आए हैं, जिनकी सेवा अवधि पांच वर्ष से कम है। इसके अलावा संविदा पर कार्यरत शिक्षकों तथा हाल में स्थानांतरण प्राप्त कर चुके शिक्षकों के नाम शामिल होने की बात भी उन्होंने कही।

तेजस्वी यादव ने सरकार से ऐसे सभी मामलों की नियमों के अनुरूप दोबारा जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि किसी शिक्षक का स्थानांतरण निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं हुआ है तो उसकी समीक्षा कर उचित निर्णय लिया जाना चाहिए।

उन्होंने उर्दू, अरबी और फारसी विषयों के स्वीकृत पदों को समाप्त नहीं करने की भी मांग की। उनका कहना है कि पर्याप्त संख्या में विद्यार्थी होने वाले विद्यालयों में इन विषयों के शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

उर्दू और संस्कृत को लेकर समान नीति की मांग

तेजस्वी यादव ने उर्दू और संस्कृत शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर भी सरकार से स्पष्ट नीति बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि संस्कृत की तरह उर्दू भी बिहार और देश की साझा सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। इसलिए दोनों भाषाओं के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए।

उन्होंने राज्य के प्रत्येक सरकारी विद्यालय में उर्दू और संस्कृत शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की, ताकि विद्यार्थियों को अपनी पसंद और पाठ्यक्रम के अनुरूप विषयों की शिक्षा मिल सके।

मदरसा और संस्कृत विद्यालयों के लंबित वेतन का मुद्दा भी उठाया

तेजस्वी यादव ने अनुदानित मदरसों और संस्कृत विद्यालयों के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों के लंबित वेतन का मुद्दा भी मुख्यमंत्री के सामने रखा। उन्होंने दावा किया कि इन संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों को करीब पांच से छह महीने से वेतन नहीं मिला है।

उन्होंने कहा कि लंबे समय से वेतन का भुगतान नहीं होने के कारण कर्मचारियों और उनके परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसका असर परिवारों के शिक्षा, चिकित्सा और रोजमर्रा के खर्चों पर भी पड़ रहा है।

राजद नेता ने सरकार से अनुदानित मदरसों और संस्कृत विद्यालयों के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों के लंबित वेतन का तत्काल और पूर्ण भुगतान कराने की मांग की।

सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री से शिक्षकों के स्थानांतरण से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने के साथ-साथ उर्दू, अरबी और फारसी के स्वीकृत पदों को सुरक्षित रखने, नियमों के विपरीत हुए तबादलों की समीक्षा करने और मदरसा एवं संस्कृत विद्यालयों के कर्मचारियों के लंबित वेतन का भुगतान कराने का आग्रह किया है।

अब इस मामले में सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर शिक्षकों और संबंधित संस्थानों की नजर बनी हुई है।

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