नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को और मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर अत्यधिक निर्भर रहने की मानसिकता से बाहर निकलना होगा। देश के हितों की रक्षा और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत को अपनी क्षमता और संसाधनों को मजबूत करना जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और ऐसे समय में भारत को अपने आर्थिक एवं रणनीतिक हितों को लेकर अधिक सजग रहना होगा। उन्होंने देशवासियों से आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान करते हुए मेक इन इंडिया और वोकल फॉर लोकल जैसे अभियानों को गति देने की बात कही।
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता का अर्थ दुनिया से अलग होना नहीं है, बल्कि अपनी क्षमताओं को इतना मजबूत करना है कि देश अपनी आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर अनावश्यक रूप से निर्भर न रहे। भारत को अपने हितों की सुरक्षा स्वयं करने में सक्षम होना चाहिए।
सेमीकंडक्टर निर्माण को बताया बड़ी उपलब्धि
प्रधानमंत्री ने देश में सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक भारत में इस क्षेत्र में बड़े स्तर पर उत्पादन की व्यवस्था विकसित नहीं हो सकी थी। अब देश में तीन सेमीकंडक्टर संयंत्र शुरू हो चुके हैं और इनके माध्यम से निर्मित सेमीकंडक्टर का निर्यात भी शुरू हो गया है।
उन्होंने इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि तकनीक और अत्याधुनिक विनिर्माण के क्षेत्र में भारत अपनी क्षमता लगातार बढ़ा रहा है। सेमीकंडक्टर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में देश की बढ़ती मौजूदगी को भविष्य की अर्थव्यवस्था और तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए अहम माना जा रहा है।
स्वतंत्रता सेनानियों को किया नमन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और महात्मा गांधी सहित देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले सभी स्वतंत्रता सेनानियों एवं महान क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि आज का दिन उन महान लोगों के त्याग, संघर्ष और बलिदान को याद करने का अवसर है, जिनके प्रयासों से भारत को अंग्रेजी शासन से मुक्ति मिली।
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता केवल अधिकारों का उत्सव नहीं, बल्कि देश के प्रति अपने कर्तव्यों को याद करने का अवसर भी है। राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है और देश को आगे ले जाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
लाल किले पर वंदे मातरम् की गूंज को बताया ऐतिहासिक क्षण
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद पहली बार 15 अगस्त के अवसर पर लाल किले पर ‘वंदे मातरम्’ की गूंज सुनाई दे रही है और इस वर्ष राष्ट्रगीत की रचना के 150 वर्ष पूरे होने का अवसर भी ऐतिहासिक है।
उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ देश की राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से जुड़ा रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस गीत ने लोगों में राष्ट्रप्रेम और आजादी की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बाढ़ और भूस्खलन प्रभावित परिवारों के प्रति जताई संवेदना
प्रधानमंत्री ने देश के कुछ हिस्सों में हाल में आई बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने प्राकृतिक आपदा में प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में पूरा देश उनके साथ खड़ा है।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रभावित लोगों को राहत और सहायता पहुंचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से आपदा प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदनशीलता और सहयोग की भावना बनाए रखने की अपील भी की।
प्रधानमंत्री के संबोधन में आत्मनिर्भरता, स्वदेशी उत्पादन, तकनीकी क्षमता, राष्ट्रभक्ति और विकसित भारत की दिशा में सामूहिक प्रयास का संदेश प्रमुखता से सामने आया। उन्होंने देशवासियों से राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए भारत की क्षमताओं को नई ऊंचाई तक पहुंचाने का आह्वान किया।








