श्रवण शर्मा
गंगोह । – कथा वाचक ने कहा कि आत्मा का परमात्मा से मिलन ही शिव में लीन हो जाना है। भगवान शंकर वैराग्य के देवता माने गए है, परंतु शिव ने विवाह भी कर संसार को गृहस्थ आश्रम में रहकर भी वैराग्य व योग धर्म का अनुशरण करने का तरीका दिया।
बाईपास मार्ग स्थित एक गार्डन में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा में कथा वाचक रजनीश जी महाराज ने कहा कि शिव परिवार में भगवान के वाहक नन्दी, मां पार्वती का शेर, गणेश जी का मूसक और कार्तिकेय का वाहन मोर है। शिव के गले मे सर्प रहते हैं जो सभी विपरीत विचारधारा के बीच सामंजस्य रखना ही शिव पुराण सिखाता है। भगवान के विवाह के वर्णन में मैनादेवी व हिमालय राज की पुत्री के रूप मे मां पार्वती का जन्म लेना। प्रारम्भिक काल मे शिव की तपस्या करना, उसी दौरान तारका सुर के आतंक को खत्म करने के लिए शिव का तन्द्रा भंग हुई। तब जाकर शिव पार्वती का विवाह हुआ। इसी दौरान भजनों में ऐ री सखी मंगल गाओ री, खुशियां मनाओ री। शुभ दिन आयो आज सखी री,मंगल आशा मन को सोहे। श्रद्धालुओं के बीच भजन की अमृत वर्षा हुई। कथा आरंभ होने से पूर्व कथा व्यास का स्वागत कर तथा माला पहनाकर व्यास गद्दी पर बैठाया। सोमवार को सुबह पुर्णतया वैदिक रस्मोरिवाज के साथ आचार्य रजनीश की देखरेख में 15 सदस्यीय विद्धानों की टीम ने विधि विधान के साथ पीतवस्त्र धारी चंदन तिलकधारी श्रद्धालुओं संग पार्थिव शिवलिंग की प्रतिष्ठापन्ना कराकर महारुद्राभिषेक सम्पन्न कराया। भगवान शिव को विभिन्न तरह के पुष्प, भांग, धतुरा, फल व मिष्ठान्न अर्पित किये गये। इसके अलावा मंत्रोचारणके बीच भस्म स्नान कराया गया। कार्यक्रम के दौरान वातावरण पूरी तरह धार्मिक बना रहा। यजमानों ने अभिषेक कराया। यजमानों ने क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और विश्व कल्याण की कामना की। कथा के समापन पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ की आरती में भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया।








