
शहरी चौपाल ब्यूर
मेरठ, किसान नेता दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय पर मारपीट और यातनाएं देने के आरोप लगाए। इस मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा है। वहीं चंद्रशेखर ने इसे कानून का खुला दुरुपयोग बताया। मेरठ में किसान नेता दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव से एसएसपी ऑफिस में मारपीट और थाने में थर्ड डिग्री के आरोपों का मामला शुक्रवार को दिन भर गर्म रहा। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर विरोध जताया। साथ ही प्रदेश की भाजपा सरकार को घेरा।
अखिलेश यादव ने एक्स हैंडल पर ये लिखा
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उप्र की भाजपा सरकार में किसान नेताओं पर थाने में थर्ड डिग्री की मारपीट करके प्रताड़ना देना दर्शाता है कि हार के डर से भाजपा कितनी बौखलाई है। जिन्हें भाजपा किसानों के आगे ढाल बनाकर साथ में खड़ा करना चाहती थी वो ढाल भी किसानों के आक्रोश की आग के कारण मोम ही साबित हुई है।
उस भाजपा सरकार से इससे अधिक उम्मीद क्या की जा सकती है कि वो किसानों के हित के नाम पर उनके तथाकथित हितैषियों से समझौता करके अपनी स्वार्थ सिद्धि में लगी रहकर किसान नेताओं को थर्ड डिग्री देगी और कुछ नहीं। देश भर के किसान देख लें कि भाजपा और उसके सहयोगी किस तरह सत्ता सुख में लीन रहकर किसानों पर अत्याचार कर रहे हैं।
इस मामले की गहरी जांच हो और हर दोषी के ख़िलाफ़ सख़्त दंडात्मक कार्रवाई हो और बर्खास्तगी भी। घोर निंदनीय, किसान कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा। इसके नीचे अखिलेश ने डॉ. दिग्विजय भाटी का ज़ख्मी हालत का फोटो लगाया हुआ है।
आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि मेरठ में मोहित जाटव और दिग्विजय भाटी के साथ पुलिस हिरासत में हुई बर्बरता कानून-व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही पर गंभीर सवाल करने वाली है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी यह पुलिसिंग नहीं, बल्कि वर्दी की ताकत का खुला दुरुपयोग है। पीड़ितों का आरोप है कि तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय ने दोनों को अपने कार्यालय बुलाकर गालियां दीं और चैंबर बंद कर उनके साथ मारपीट की। इसके बाद एसओजी के हवाले कर उन्हें पैर बांधकर उल्टा लटकाने और फट्टों-लाठियों से बेरहमी से पीटने का भी आरोप है। किसी भी अधिकारी को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। उत्तर प्रदेश सरकार तत्काल सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कराए, पीड़ितों का स्वतंत्र मेडिकल परीक्षण कराए और आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई हो। वर्दी कानून से बड़ी नहीं है और आम नागरिकों की आवाज को पुलिसिया ताकत के बल पर दबाना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।








