शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। मौसम में बदलाव के साथ इन्फ्लुएंजा यानी फ्लू के मामलों का खतरा बढ़ जाता है। इन्फ्लुएंजा एच1एन1 को आम बोलचाल में स्वाइन फ्लू कहा जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इसके लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण से मिलते-जुलते हो सकते हैं, इसलिए लगातार बने रहने वाले लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
स्वाइन फ्लू में अचानक बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, थकान तथा नाक बहने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मरीजों में संक्रमण गंभीर होकर निमोनिया और सांस संबंधी परेशानी का कारण बन सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों में फ्लू के गंभीर रूप लेने का खतरा अपेक्षाकृत अधिक रहता है। ऐसे लोगों में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।
ऐसे करें बचाव
फ्लू से बचाव के लिए नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धोना, खांसते या छींकते समय मुंह-नाक को ढकना और बीमार होने पर दूसरों से दूरी बनाए रखना जरूरी है। आंख, नाक और मुंह को बार-बार छूने से भी बचना चाहिए। भीड़भाड़ और बंद स्थानों में संक्रमण के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार डॉक्टर की सलाह से वार्षिक फ्लू वैक्सीन भी गंभीर संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है। हल्के लक्षणों में पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ लेना उपयोगी रहता है, जबकि गंभीर लक्षणों में चिकित्सक की सलाह के अनुसार उपचार जरूरी है।
सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल बुखार या खांसी होने से स्वाइन फ्लू की पुष्टि नहीं होती। जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय जांच और प्रयोगशाला परीक्षण से संक्रमण की पुष्टि की जाती है। तेज या लगातार बुखार, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी अथवा हालत बिगड़ने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।








