काठमांडू । नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर ढहने के बाद आई अचानक बाढ़ और मलबे के सैलाब से अब तक 939 लोगों की मौत और करीब 3,925 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। नेपाल सरकार के अनुसार राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है तथा प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए सुरक्षा बलों और विशेषज्ञ टीमों को लगाया गया है।
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने 1 सितंबर को जारी जानकारी में बताया कि बाढ़ के बाद बड़े पैमाने पर खोज, बचाव और राहत अभियान चलाया जा रहा है। सरकार का मुख्य लक्ष्य लापता लोगों का पता लगाना, जीवित लोगों को सुरक्षित निकालना और प्रभावित परिवारों तक आवश्यक राहत पहुंचाना है। अधिकारियों ने कहा है कि मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े बचाव एवं सत्यापन अभियान के साथ लगातार बदल सकते हैं।
भारत में नदियों से मिले 17 शव
नेपाल में आई बाढ़ का असर भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी दिखाई दिया है। उत्तर प्रदेश में नेपाल से होकर आने वाली नदियों से अब तक 17 शव बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन शवों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। अधिकारियों का कहना है कि अभी यह पुष्टि नहीं हुई है कि सभी शव नेपाल में बाढ़ से लापता लोगों के ही हैं।
हजारों लोगों की तलाश जारी
बाढ़ के कारण नेपाल के कई पर्वतीय जिलों में सड़क, पुल, बिजली व्यवस्था और अन्य बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। दूरदराज के इलाकों में पहुंचना राहत और बचाव टीमों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। कई जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले श्रमिक भी लापता बताए गए हैं। सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए विशेष तकनीकी टीमों की मदद ली जा रही है। भारत, चीन और दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञ भी बचाव अभियानों में सहयोग कर रहे हैं।
592 विदेशी नागरिक भी लापता
नेपाल की लापता लोगों की सूची में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 592 विदेशी नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले सैकड़ों श्रमिकों का भी अभी पता नहीं चल पाया है। नुवाकोट और रसुवा जैसे जिले बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं।
ग्लेशियर ढहने के बाद आई तबाही
बताया जा रहा है कि चीन-नेपाल सीमा के पास हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर ढहने के बाद बड़ी मात्रा में बर्फ, पानी, चट्टान और मलबा नीचे की ओर आया। इससे नदियों में अचानक जलस्तर बढ़ गया और तेज बहाव ने रास्ते में आने वाले गांवों, सड़कों, पुलों और अन्य ढांचों को भारी नुकसान पहुंचाया।
नेपाल सरकार ने हालांकि बाढ़ की सटीक वजह और ग्लेशियर ढहने की परिस्थितियों की जांच जारी रहने की बात कही है। प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने इस आपदा को हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते जलवायु जोखिम से जोड़ते हुए जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता बताई है।
राहत-बचाव अभियान में जुटे हजारों जवान
नेपाल सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में सुरक्षा कर्मियों और हेलीकॉप्टरों को तैनात किया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार हजारों लोगों को अब तक सुरक्षित निकाला जा चुका है और राहत सामग्री, भोजन, पेयजल तथा चिकित्सा सुविधाएं प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाई जा रही हैं। सुरंगों और दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
नेपाल सरकार ने मीडिया और आम लोगों से अपील की है कि वे आपदा से जुड़े आंकड़ों के लिए केवल आधिकारिक और सत्यापित सूचनाओं पर भरोसा करें। खोज और सत्यापन का काम जारी रहने के कारण मृतकों और लापता लोगों की संख्या में आगे भी बदलाव की संभावना है।








