शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। राधा स्वामी सत्संग ब्यास के पिलखनी स्थित मेजर सेंटर में बुधवार को हुजूर जसदीप सिंह गिल जी महाराज ने सत्संग फरमाया। आयोजकों के अनुसार करीब सात लाख संगत ने सत्संग सुना। विशाल आध्यात्मिक समागम के दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह दिखाई दिया। आयोजन से पहले अंगदान पर आधारित एक लघु फिल्म दिखाई गई। इसके बाद शबद और कबीर साहिब की बाणी का गायन हुआ। करीब 9:25 बजे हुजूर महाराज पंडाल में पहुंचे और गद्दी के समक्ष नतमस्तक होकर दोनों ओर बैठी संगत का अभिवादन किया।

बुद्धि और विवेक से आध्यात्मिक मार्ग पर चलने का संदेश
सत्संग में हुजूर जसदीप सिंह गिल जी महाराज ने गुरु अमर दास जी की बाणी ‘जग जीवन सांचा एको दाता’ के माध्यम से आध्यात्मिक जीवन के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि संत-महापुरुष मानव कल्याण के लिए आते हैं और परमात्मा तक पहुंचने का मार्ग सरल बनाते हैं, लेकिन मनुष्य कई बार आध्यात्मिक संदेशों को समझने के बजाय उन्हें केवल कर्मकांड और परंपराओं तक सीमित कर देता है।
उन्होंने कहा कि सांसारिक कार्यों में व्यक्ति योजना, तर्क और विवेक का इस्तेमाल करता है, लेकिन आध्यात्मिक जीवन में कई बार दूसरों की देखा-देखी करने लगता है। परमात्मा की खोज में भी बुद्धि और विवेक का प्रयोग किया जाना चाहिए।
अनुशासन और निरंतर अभ्यास को बताया जरूरी
हुजूर महाराज ने कहा कि दृढ़ता, अनुशासन और अभ्यास के अभाव में आध्यात्मिक प्रगति कठिन हो जाती है। मनुष्य संसार की वस्तुओं को अपना मानता है, जबकि परमात्मा के नाम को सबसे कम महत्व देता है। उन्होंने कहा कि मालिक एक है और अलग-अलग धर्मों में उसके नाम भले ही अलग हों, लेकिन दिव्य ज्योत सभी में एक ही है।
उन्होंने जाति, ऊंच-नीच और सामाजिक भेदभाव को अहंकार से उत्पन्न बताया। उन्होंने कहा कि रिश्तों में जाति, कुंडली, रूप या धन के बजाय व्यवहार, चरित्र, बड़ों के सम्मान और ईमानदार कमाई को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए।
नाम भक्ति को बताया वास्तविक सेवा
हुजूर जसदीप सिंह गिल जी महाराज ने नाम भक्ति को वास्तविक सेवा बताते हुए कहा कि मानव जीवन दुर्लभ है और इसके लिए रोजाना अनुशासन आवश्यक है। उन्होंने मोबाइल फोन और देर रात तक जागने की आदतों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज मनुष्य इन व्यस्तताओं के बीच अपने आध्यात्मिक जीवन के लिए पर्याप्त समय नहीं निकाल पाता।
उन्होंने कहा कि मन को साधने में समय लगता है, लेकिन धैर्य और निरंतर अभ्यास से मन धीरे-धीरे स्थिर होने लगता है। ‘बिन नामे मुक्त न पाई, ओर बिन सतगुरु नाम न पाई’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने नाम सिमरन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि परमार्थ के मार्ग पर भी मेहनत करनी पड़ती है तथा अनुशासन और धैर्य को जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है।
सेवादारों को दिए दर्शन और प्रसाद
सत्संग के बाद शाम करीब 4:30 बजे हुजूर महाराज ने कई दिनों से आयोजन की व्यवस्थाओं में जुटे सेवादारों को दर्शन और प्रसाद दिया। विशाल आयोजन के दौरान यातायात, लंगर और संगत की व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए सेवादार लगातार सेवा में जुटे रहे।
गुरुवार को सहारनपुर में पहले से पंजीकृत श्रद्धालुओं को नामदान दिया जाएगा।








