UP Flood 2026: यूपी में बाढ़ से 8 मौतें, 565 से ज्यादा मकान ढहे; गंगा-यमुना समेत कई नदियां उफान पर

उत्तर प्रदेश में लगातार मूसलाधार बारिश और नदियों के उफान से बाढ़ की स्थिति गंभीर है। बारिश-बाढ़ से 8 मौतें, 565 से अधिक मकान ढहे और सैकड़ों गांव जलमग्न हैं। NDRF-SDRF राहत-बचाव में जुटी हैं।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने बाढ़ की स्थिति को बेहद गंभीर बना दिया है। प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ का पानी गांवों और आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश कर गया है। बारिश और बाढ़ से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में अब तक 8 लोगों की मौत होने की सूचना है। वहीं, सैकड़ों गांवों के जलमग्न होने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर ग्रामीण इलाकों का संपर्क मुख्य मार्गों से टूट गया है और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अलर्ट जारी करते हुए राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। संवेदनशील इलाकों में प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। जलस्तर बढ़ने के कारण निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।

चित्रकूट में बारिश और बाढ़ से भारी नुकसान

लगातार बारिश और बाढ़ का सबसे गंभीर असर बुंदेलखंड के चित्रकूट जिले में दिखाई दे रहा है। यहां नदियों और नालों के उफान पर आने से बड़ी संख्या में गांव प्रभावित हुए हैं। जानकारी के अनुसार जिले में अब तक 565 से अधिक मकान ढह चुके हैं। कई परिवारों के सामने सिर छिपाने का संकट पैदा हो गया है।

मकानों के क्षतिग्रस्त होने के बाद प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है। राहत शिविरों में भोजन, पेयजल और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रभावित लोगों के लिए तिरपाल आदि की व्यवस्था भी की जा रही है। हालांकि, कई इलाकों में लगातार बारिश होने के कारण राहत एवं बचाव कार्यों में भी चुनौतियां सामने आ रही हैं।

गंगा-यमुना समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ा

प्रदेश में लगातार बारिश के चलते प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। गंगा, यमुना, घाघरा और शारदा समेत कई नदियां विभिन्न स्थानों पर चेतावनी अथवा खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। नदियों के किनारे और निचले इलाकों में बसे गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

बाढ़ के पानी से खेतों में खड़ी फसलें भी प्रभावित हुई हैं। कई इलाकों में सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि पानी में डूब गई है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की चुनौती भी प्रशासन के सामने बनी हुई है।

कई गांवों का मुख्य मार्गों से संपर्क टूटा

बाढ़ का पानी सड़कों और संपर्क मार्गों पर पहुंचने के कारण कई गांवों का मुख्य मार्गों से संपर्क बाधित हो गया है। कुछ क्षेत्रों में आवागमन के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। पानी बढ़ने के कारण प्रशासन की ओर से लोगों को जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण स्थिति लगातार बिगड़ रही है। घरों में पानी घुसने के साथ ही दैनिक जरूरतों की वस्तुओं और पशुओं की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती बन गई है। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटा है।

NDRF और SDRF की टीमें तैनात

बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए NDRF और SDRF की टीमें नावों के साथ प्रभावित इलाकों में तैनात की गई हैं। जलभराव वाले क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। जरूरत के अनुसार लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है।

प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव टीमों को लगातार सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील स्थानों पर जलस्तर की निगरानी की जा रही है। आपात स्थिति में लोगों तक चिकित्सा सहायता पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमों को भी तैयार रखा गया है।

जिलाधिकारियों को खुद प्रभावित क्षेत्रों में जाने के निर्देश

बाढ़ की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से सभी संबंधित जिलाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। जिलाधिकारियों से कहा गया है कि वे स्वयं बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर स्थिति का जायजा लें और प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री, भोजन, पेयजल तथा चिकित्सा सहायता तत्काल पहुंचाना सुनिश्चित करें।

प्रशासन को राहत शिविरों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा प्रभावित परिवारों की जरूरतों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। अधिकारियों को बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बढ़ी सतर्कता

बारिश और नदियों के जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए प्रशासन ने निचले और नदी किनारे के क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। ग्रामीणों को नदी, नाले और तेज बहाव वाले पानी के पास जाने से बचने की अपील की जा रही है। प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ-साथ उन्हें समय पर राहत और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

फिलहाल प्रदेश के कई हिस्सों में बाढ़ और बारिश से हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। लगातार बारिश और नदियों के जलस्तर पर प्रशासन की नजर है। आने वाले दिनों में जलस्तर में और बढ़ोतरी होने की स्थिति में निचले इलाकों में खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में राहत एवं बचाव एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

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