Saharanpur News: “कब्जा हटाना था तो पूरी मस्जिद क्यों गिराई?” चंद्रशेखर आजाद ने उठाए बुलडोजर कार्रवाई पर सवाल

सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि कब्जा हटाना था तो पूरा ढांचा क्यों गिराया गया और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान क्यों नहीं हुआ।

mशहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद पर हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर नगीना सांसद एवं आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि मामला केवल कथित अवैध कब्जे को हटाने का था तो पूरे ढांचे को ध्वस्त करने की जरूरत क्यों पड़ी।

चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि जिले के एक बड़े प्रशासनिक अधिकारी से बातचीत के दौरान उन्हें मामले की जानकारी मिली थी। उनके अनुसार, रात में जिस तरह की स्थिति थी और प्रशासन की ओर से जो भरोसा दिलाया जा रहा था, उसके बाद सुबह-सवेरे बुलडोजर कार्रवाई होना चिंताजनक है।

उन्होंने कहा कि कब्जा हटाना अलग विषय है और पूरी इमारत को गिरा देना अलग। यदि प्रशासन का कहना था कि जमीन पर अवैध कब्जा है तो कब्जे वाले हिस्से को हटाया जा सकता था, लेकिन पूरे ढांचे को ध्वस्त किए जाने पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान जरूरी

नगीना सांसद ने कहा कि देश में कानून और न्यायिक प्रक्रिया के तहत किसी भी पक्ष को अपील का अधिकार प्राप्त है। ऐसे में ऊपरी अदालतों के अधिकार और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्रवाई में संविधान और कानून की मूल भावना का पालन होना जरूरी है।

चंद्रशेखर आजाद ने अचानक रात या सुबह-सवेरे बुलडोजर कार्रवाई किए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब किसी मामले में न्यायिक प्रक्रिया और अपील के रास्ते मौजूद हैं तो इतनी जल्दबाजी में कार्रवाई क्यों की गई।

उन्होंने कहा कि सहारनपुर उनका अपना शहर है और वह यहां के पुराने इतिहास तथा लंबे समय से मौजूद भवनों से परिचित हैं। यदि किसी निर्माण को अवैध बताया जा रहा है तो प्रशासन को उससे संबंधित पुराने दस्तावेज और रिकॉर्ड भी सार्वजनिक करने चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रशासन के पास संपत्ति और उसके निर्माण से संबंधित सभी दस्तावेज मौजूद हैं।

अनुच्छेद 25 और 26 का किया उल्लेख

चंद्रशेखर आजाद ने धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में प्रशासन को विशेष संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून सभी नागरिकों और सभी समुदायों के लिए समान होना चाहिए।

उन्होंने सहारनपुर की गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे का उल्लेख करते हुए कहा कि शहर लंबे समय से सामाजिक सौहार्द के लिए जाना जाता है। ऐसे में ऐसी कार्रवाई से बचना चाहिए जिससे किसी वर्ग में अन्याय या भेदभाव का संदेश जाए।

धार्मिक भावनाओं से न खेलें’

नगीना सांसद ने सरकार और प्रशासन से सवाल किया कि क्या ऐसी कार्रवाई किसी को राजनीतिक रूप से खुश करने के लिए की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को सभी लोगों को साथ लेकर चलना चाहिए और धार्मिक मामलों को राजनीति से दूर रखना चाहिए।

उन्होंने मांग की कि सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद से जुड़े पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही निर्माण की कानूनी स्थिति, जमीन से संबंधित दस्तावेज और पूरे ढांचे को ध्वस्त करने के निर्णय का आधार स्पष्ट किया जाए।

चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि सहारनपुर भाईचारे के लिए जाना जाता है। प्रशासन को ऐसी कार्रवाई से बचना चाहिए जिससे शहर का सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो।

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